बहुप्रदेशी!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बहुप्रदेशी – काय; जो बहुप्रदेशी होता है अर्थात् 6 द्रव्यों में 5 द्रव्य (जीव, पद्गल, धर्म, अधर्म और आकाश) बहुप्रदेशी होने से अस्तिकाय है। Bahupradesi- Something multi space pointing
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बहुप्रदेशी – काय; जो बहुप्रदेशी होता है अर्थात् 6 द्रव्यों में 5 द्रव्य (जीव, पद्गल, धर्म, अधर्म और आकाश) बहुप्रदेशी होने से अस्तिकाय है। Bahupradesi- Something multi space pointing
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भव्यज्ञायक शरीर – Bhavyagnayaka Sarira. One who is going to be learned one in future. नो आगम द्रव्य का एक भेद; जो कर्म के स्वरूप को कहने वाले शास्त्र का जानने वाला आगे होगा वह भव्यज्ञायक शरीर कहलाता हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बाला (देवी) – गजदंत कूट, पहद एवं वैमानिक इन्द्रों की देवी का नाम। Bala (Devi)- Name of female deities of Gajadant summit, of padma lake & of spatial Indras
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बलमद- 8 मदों में एक मद; मैं सहस्त्रभट, लक्षभट, कोटिभट हूँ इस तरह का अहंकार होना। Balamada- pride of possessing strength
[[श्रेणी : शब्दकोष]] वैद्यसार –Vaidyasara Name of an Ayurvedic book written by AcharyaPujyapad. आचर्य पूज्यपाद (ई. श. ५) कृत आयुर्वेद विषयक एक संस्कृत ग्रंथ “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बप्पदेव- आचार्य शुभनन्दि के शिाय जिन्दोंने षट्खण्डागम के प्रथम पाँच खण्डों पर व्याख्या प्रज्ञप्ति तथा कवाय पाहुड़ पर उच्चारणा नामक टीका लिखी। इस टीका के दर्शन करके श्री वीरसेन आचार्य ने धवला नामक टीका रची। समय- ई.श. 1। Bappadeva- An acharya who wrote many famous commentary
देवपूजक A worshipper of Lord Arihant. जिनेन्द्र देव की पूजा करने वाला।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
उद्योत नामकर्म प्रकृति A karmic nature causing effulgence (lustrous) body. जिसके निमित्त से शरीर में उद्योत होता है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
आत्मव्यवहार Conception of self consciousness. मात्र अविचलित चेतना ही मैं हूँ ऐसा मानना।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
थानक पंथी / थानकवासी A shvetambar Jain sect. श्वेताम्बर जैन पंथ, ये प्रतिमा को नहीं पूजते हैं, साधु वस्त्र एंव मुह पर पट्टी रखते हैं । [[श्रेणी: शब्दकोष ]]