त्रिपंचाशत् भाव!
त्रिपंचाशत् भाव Fifty three types of subsidential disposition. जीवों के औपशमकादिभाव जो 53 प्रकार के हैं। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
त्रिपंचाशत् भाव Fifty three types of subsidential disposition. जीवों के औपशमकादिभाव जो 53 प्रकार के हैं। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
उत्तमार्थ A type of repentance, recounting the unexpiated sins (reg. whole life) and repenting for them. प्रतिक्रमण का एक भेद जन्म से मरणपर्यंत लगे हुए दोषों की शुद्धि करना।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शरीर पर्याप्ति – Sharera Paryaaypti. Formation of assential elements of body. पर्याप्ति के छः भेदों में दूसरा भेद, जिन परमाणुओं को खल्रूप परिणमाया था उनको हाड, रस,रुधिर आदि रूप परिणमावने की कारण भूत जीव की शक्ति की पूर्णता को शरीर पर्याप्ति कहते हैं “
आपवादिक लिंग White clothed Digambar Jain ascetics etc. परिग्रह सहित भेष या चिन्ह, आर्यिका (उपचार महाव्रती) ऐकल क्षुल्लक आदि जैनधर्म में दो मार्गं हैं- उत्सर्ग मार्ग और अपवाद मार्ग।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
देवमंत्री Ruling deity of 6th Lunar ‘Pushya’. छठवें नक्षत्र ‘पुष्य’ के अधिपति देवता का नाम।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
उत्कीलन A divine medicinal remedy. एक दिव्य औषधि जिसके द्वारा कीलित व्यक्ति को उत्कीलित किया जाता था।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
एक जीव-नानाअजीव कर्म A type of division of karma. कर्म के समवदान आदि भेदों में एक भेद।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
उच्छिष्टावली Fragmentary period of time. कर्मों की स्थिति घटते-घटते जो आवली मात्र स्थिति शेष रह जावे उसका नाम उच्छिष्टावली है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]