षष्ठ अनुव्रत!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] षष्ठ अनुव्रत – Sastha Anuvrata. A vow-renouncement of food taking after sun-set. रात्रि भोजन त्याग छठा अनुव्रत है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] षष्ठ अनुव्रत – Sastha Anuvrata. A vow-renouncement of food taking after sun-set. रात्रि भोजन त्याग छठा अनुव्रत है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रिय- जो वस्तु अपने को पसंद हो, रमणीय, अनुकूल, उत्तरधातकी-खण्डद्वीप का रक्षक देव। Priya – favorite thing, dear one
तमोबाण Dark night, a night during the wane of the moon, A cave of the Vijayardh mountain. अंधकार का प्रसार करने वाला बाण , इसे भास्कर बाण से प्रभावहीन किया जाता है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] षट्प्राभृत टीका – Satpraabhrita Teekaa. The Sanskrit commentary book on ‘Shatprabhrit’ treatise. कुन्दकुन्द आचार्य के षट्प्राभृत की आचार्य श्रुतसागर (ई. सन् 1487-1533) कृत संस्कृत टीका “
तपोनिधिव्रत A vow of fasting for 1057 days with particular procedure. एक व्रत का नाम जिसमें 1057 दिन विधि पूर्वक व्रत किये जाते हैं। विशेष देखें – हरिवंशपुराण ग्रंथ में।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] षट् आवश्यक – Sat Aavashyaka. Six essential duties of Jaina saints. मुनियों के 6 आवश्यक कर्त्तव्य; सामायिक, वंदना, स्तुति,प्रतिक्रमण, स्वाध्याय और कार्योत्सर्ग “
तन्मनोहरांगनिरीक्षण त्याग Renunciation of watching the beauty of women. ब्रहाचर्य व्रत की दूसरी भावना स्त्रियों के मनोहर अंगों को देखने का त्याग। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्वेतपंचमी व्रत – Shvetapanchami Vrata. A particular & procedural vow (fasting). ऐसा व्रत जिसमे आषाढ, कार्तिक व फाल्गुन तीनों में से किसी भी मास में प्रारम्भ करके 65 महीनों तक प्रत्येक मास शुक्ल 5 का उपवास किया जाता है व त्रिकाल नमस्कार मंत्र का जाप किया जाता है “
तदुभय प्रत्ययिक जीव बंध Sentiments devolped through the fruition & prematured fruition of karmas. जीव भाव बंध का एक भेद कर्मां के उदय और उदीरणा से तथा उनके उपशम से जो भाव उत्पन्न होते हैं (अर्थात् जीव के क्षयोपशमिक भाव)। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्रेणीबद्ध – Shreneebaddha. Sequential; the dwelling & aboding places of hell & heaven (i.e. Bil & Viman respectively). स्वर्ग व नरक के श्रेणीबद्ध विमान व बिल, चारो दिशाओं व विदिशाओ में पंक्ति रूप जो विमान व बिल हैं उनकी श्रेणीबद्ध संज्ञा है “