नादग्रह!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] नादग्रह – Nadagraha A part of the palace of deities भवनवासी देवों के भवनों में एक कक्ष ”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] नादग्रह – Nadagraha A part of the palace of deities भवनवासी देवों के भवनों में एक कक्ष ”
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == शिथिलाचारी : == सन्त्येकेभ्यो भिक्षुभ्य:, अगारस्था: संयमोत्तरा:। अगारस्थेभ्य सर्वेभ्य:, साधव: संयमोत्तरा:।। —समणसुत्त : २९८ यद्यपि शुद्धचारी साधुजन सभी गृहस्थों से संयम में श्रेष्ठ होते हैं तथापि कुछ (शिथिलाचारी) भिक्षुओं की अपेक्षा गृहस्थ संयम में श्रेष्ठ होते हैं।
खलूरिका Armoury, Archery learning place, Parade ground. आयुधशाला, धनुर्विद्या सीखने का स्थान, परेड का मैदान । [[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विरत – Virata. Free from woridly attachment, Indifferent, the 6th & 7th stages of spiritual development. संयम ” गुणस्थान – छठा, सातवां “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] पृथत्त्क्व व्यवहार – Prthaktva Vyavahara. Nature of unity in diversity. व्यवहार का एक भेद; जहाँ पर भिन्न द्रव्यों में एकता का संबंध दिखाया जाता है उसे पृथत्त्क्व व्यवहार कहते हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रतिश्रवण – Pratishravana. Counter listening ( afault of saint food taking-acceptance of food with counter listening of preparation of food for self purpose). जैन साधू के आहार से संबंधितअनुमति दोष के 3 भेदों में से एक भेद; ‘यह आहार आपके लिए निमित्त बनाया गया है’ आहार से पहिले या पीछे इस परकार के वचन…
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == सेना : == कार्यकृद् गृह्यको जन:। —त्रिषष्टिशलाका : १-१-९०८ जो कार्य (सेवा) करता है, लोग उसे पूजते ही हैं।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रतिलेखन – Partilekhana. Purifying the place, article etc. with Pichhika by jaina-saints for non-voilence. जैन साधू-साध्वियों द्वारा उठते-बैठते आदि समय पिच्छिका से स्थान , वस्तु आदि का जीवरक्षा हेतु परिमार्जन करना “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] बालाग्र – Balagra. A area unit. क्षेत्र का प्रमाण विशेष ” अपरनाम केशाग्र “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रतिमा योग – Pratimaa Yoga. A posture of meditation (standing erect). कायोत्सर्ग मुद्रा; इसमें प्रतिमा के सामने खड़े होकर ध्यान किया जाता है “