भित्तिकर्म!
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भित्तिकर्म – Bhittikarma. Sculpted work, engravement on wall etc. घर की दीवारों में उनसे अभिन्न रची गई प्रतिमाओं का नाम भित्तिकर्म है “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भित्तिकर्म – Bhittikarma. Sculpted work, engravement on wall etc. घर की दीवारों में उनसे अभिन्न रची गई प्रतिमाओं का नाम भित्तिकर्म है “
चतुर्दश भूत ग्राम Fourteen Jiva Samas are called Chaturdash Bhutgram. चौदह जीव समास ही चौबीस भूत ग्राम अर्थात् जीवसमूह कहलाते हैं ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] समपर्यकासन तप – Samaparyamkaasana Tapa. A meditational posture (as austerity). कायक्लेश तप का एक भेद। आसन-जिसमें पिडंलियाॅ और स्फिक बराबर मिल जायें वह समपर्यकासन है।
चरण Ascetic conduct, involving in introspection. चारित्र ; अपने में अर्थात् ज्ञानस्वभाव में ही निरंतर रमण करना ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी: शब्दकोष]] मध्य ग्रैवेयक – Madhya Graviveyaka. Three particular heavenly abodes among 9 Graiveyaks. 9 ग्रैवेयक विमानों में बीच के तीन विमान ;यशोधर,सुभद्र , सुविशाल “
उदय व्युच्छित्ति Lack of Karmic fruition in future time. उदय का आगे अभाव जिस गुणस्थान में जितनी प्रकृतियों की उदय व्युच्छित्ति हो उनका उदय उसी गुणस्थान तक है आगे नहीं।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
गोरति Name of a Vidyadhar-one proficient in super power by birth. एक महारथी विद्याधर ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी: शब्दकोष]] मद्यांग जातीय कल्प वृक्ष- Madyamga Jatiya Kalpavrksha. A type of wish fulfilling tree (providing exhilarating liquids). कल्पवृक्ष ; फैलती हुई सुंगंधि से युक्त तथा अमृत के समान मीठे मधु-मैरेय, सीधु, अरिष्ट और आसव आदि अनेक प्रकार के रसों को प्रदान करने वाले कल्प वृक्ष ” उपचार से इन वृक्षों को मद्यांग कहा है…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रूधिर अंतराय – आहार सम्बन्धी एक अंतराय, आहार करते समय साधु को अपनंे अथवा दूसरे के षरीर के रक्त बहता दिख जाना। Rudhira Amtaraya-A type of obstacle (Bleeding) related to saint food