नैमित्तिक व्युत्सर्ग!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] नैमित्तिक व्युत्सर्ग – Naimittika Vyutsarga. Activities of occasional abandonments. नियतकाल व्युत्सर्ग (त्याग) का एक भेद; पर्व के दिनों में की जाने वाली क्रियाएं व निषद्या आदि क्रिया करना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] नैमित्तिक व्युत्सर्ग – Naimittika Vyutsarga. Activities of occasional abandonments. नियतकाल व्युत्सर्ग (त्याग) का एक भेद; पर्व के दिनों में की जाने वाली क्रियाएं व निषद्या आदि क्रिया करना “
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मृदंगमध्य व्रत–Mradngmadhya Vrat. A particular type of fasting. एक व्रत जिसमे क्रमशः 2,3,4,5,4,3,2 उपवास एवं बीच के खली दिनों में पारणा कीजाती है” इसमें23 उपवास 7 पारणाएँ की जाती है”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वज्रनाभि – Vajranaabhi Past-birth soul of Lord Rishabhdev & Lord Parshvnath, Past-birth name of Lord Vimalnath’s father, Name of a chief disciple of Lord Abhinandannath. भगवान ऋषभदेव के तीसरे तथा भगवान पार्श्वनाथ के चौथे पूर्वभव का जीव , तीर्थंकर विमलनाथ के पूर्वभव के पिता , भगवान अभिनन्दंननाथ के एक गणधर का नाम
[[श्रेणी:शब्दकोष]] नेमिनाथ बारहमासा – Neminaatha Baarahamaasaa. Name of a book. बूचिराज (ई.शु.16) कृत राजमति के उद्दगार विषयक एक काव्य कृति “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] पृथिवीपाल – Prthivipala. Name of the writer of ‘Shrut Panchami Rasa’, Name of a Pandit. पानीपत का निवासी था, वि. १६९२ में श्रुत पंचमी रास की रचना की, एक पंडित; व्रत कथाकोष छंद के कर्ता “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शीतोपचार – Sheetopachaara. Treatment with cold means in prickly hot days. अपवाद मार्ग, उष्णकाल में शीतक्रिया द्वारा वेदना का उपशमन करना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] नृत्यमंडप – Nrityamandapa. Dancing court in temple etc. मंदिर, चैत्यालय आदि में नृत्य के लिए स्थान “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भवाननुगामी – Bhavananugami. A type of clairvoyance (not remains with one in next birth). अननुगामी अवधिज्ञान का एक भेद; जो भवान्तर के साथ नहीं जाता , क्षेत्रान्तर में ही साथ जाता है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] नीलकंठ – Neelakantha. Name of the 3rd predestined Pratinarayan of Bharat Kshetra (Region). भरतक्षेत्र के आगामी तीसरे प्रतिनारायन “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भावस्तवन – Bhavastavana. Eulogical praising of Lord Jinendra. जिनेन्द्र भगवान के गुणों का स्मरण करना “