चर्मरत्न!
चर्मरत्न A jewel of Chakravarti (emperor) helps in walking through water without sinking. चक्रवर्ती का एक अचेतन रत्ना . जिसे जल पर बिच्छा देने से थलवत् गमन होता है ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
चर्मरत्न A jewel of Chakravarti (emperor) helps in walking through water without sinking. चक्रवर्ती का एक अचेतन रत्ना . जिसे जल पर बिच्छा देने से थलवत् गमन होता है ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] समाधान क्रिया – Samaadaana Kriyaa. A kind of passionful influx, to be restraintless or to violate the vows etc. साम्परायिक आस्त्रव की 25 क्रियाओ मे एक क्रिया; संयमी पुरुष का असंयम के अभिमुख होना। यह प्रमादवर्धक क्रिया होती है।
चतुरिन्द्रिय Four – sensed beings. स्पर्शन , रसना , घ्राण , चक्षु ये ४ इन्द्रियाँ जिन जीवों के होती हैं वे चतुरिन्द्रिय जीव हैं . जैसे -मक्खी , मच्छर आदि ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
चित्तवृत्ति State of mind, trend of thought, Inclination. मनःस्थिति ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] समवाय संबंध – Samvaaya Sambamdha. Relation of inseparability. अयुत सिद्व (एक दूसरे के बिना न रहने वाले) आधार्य (पट) और आधार (तंतु) पदार्थों का इह प्रत्यय हेतु (इन तन्तुओ मे पट है) सम्बंध (वैषेषिक मान्य) समवाय सम्बंध है।
थोस्सामिदंडक A lesson for the prayer of Jaina Lord . थोस्सामिहं जिणवरे-इत्यादिरूप एक चौबीस तीर्थंकर स्तुति का प्राकृत पाठ। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शुभ वचन – Shubha Svapna. Auspicious dreams. वात, पितादि के प्रकोप से रहित सूर्य चंद्रमा आदि को देखना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] समयसार कलश – Samayasaara Kalasha. Name of a specific composition by Acharya Amritchandra. आचार्य अमृतचन्द्र द्वारा समयसार की आत्मख्याति टीका मे प्रयुक्त किये गये विशेष छंद कलश नाम से कहे गये है। समय ई. 905-955।
त्रैलोक्यजिनालयव्रत A type of vow (fasting) to be observed for different 48 days in regard to different temples of Teenlok (three worlds). तीन लोक में अकृत्रिम – शाश्र्वत जिन मंदिर 856, 97, 481 है। अधोलोक के भवनवासी देवों के 10 भेदों के मंदिरों की अपेक्षा 10, मध्यलोक के पंचमेरू आदि के 12, वयतरों के 8,…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शुभध्यान – Shubhadhyaana. Auspicious involvement. शुभद्ध्यान और शुक्लध्यान जो मोक्ष के कारण हैं “