लय!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लय – लीनता, तन्यमयता जो मुनि कल्पना के जाल को दूर करने अपने चैतन्य आनंन्दमय स्वरूप में लय को प्राप्त होता है वही निष्चयरत्नत्रय का स्थान होता है। Laya-Absolute engrossment
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लय – लीनता, तन्यमयता जो मुनि कल्पना के जाल को दूर करने अपने चैतन्य आनंन्दमय स्वरूप में लय को प्राप्त होता है वही निष्चयरत्नत्रय का स्थान होता है। Laya-Absolute engrossment
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रलय- विनाष, सृश्टि विनाष। अवसर्पिणी काल में छठें-दुखमा काल के उनचास दिन कम इक्कीस हजार वर्शो के बीत जाने पर जंतुओं को भयदायक घोर प्रलयकाल प्रवृत्ती होता है। Pralaya- Dissolution of the world, disaster, catastrophe
उद्दिष्ट Intended, Purposeful, With motive. जिसका विचार किया हो उद्देश्य बंधा हो नियत की हुई हो।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
आलुंच्छन A form of self criticism. आलोचना के 4 स्वरूपों में एक भेद- कर्मरूपी वृक्ष का मूल छेदने में समर्थ ऐसा समभावरूप स्वाधीन निज परिणाम।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रमार्जित- पिच्छी आदि कोमल उपकरण से साफ की हुई भूमि आदि। Pramarjita- Carefully purified place, body etc
देव भवन Abode of deities. चारों निकायों के देवों के भवन (प्रत्येक भवनों में जिनमंदिर होते हैं)। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रत्येक भंग- जहां अलग-अलग भाव हो वह प्रत्येक भंग है। pratyeka bhamga – each part, different feelings.
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रत्येक पद- जो भ्ज्ञाव एक जीव के एक काल में यगपत संभव हो ऐसे भाव प्रत्येक पद कहलाते है। pratyeka pada – feelings simultaneously existing of one in a praticular time period
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भूपाल चतुर्विशतिका टीका – Bhupala chaturvishtika Tika. Name a commentary book written by pandit Ashadhar. पं. आशाधर (ई. ११७३-१२४३) कृत संस्क्रत टीका “