वकुश!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वकुश –Vakush: Jain saints with attachments . चितकबरा ;जैसा सफेद पर काले धब्बे होते हैं वैसे ही मुनिगण जिनके निर्मल आचार (चारित्र ) में शरीर आदि का मोह धब्बे की तरह होता है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वकुश –Vakush: Jain saints with attachments . चितकबरा ;जैसा सफेद पर काले धब्बे होते हैं वैसे ही मुनिगण जिनके निर्मल आचार (चारित्र ) में शरीर आदि का मोह धब्बे की तरह होता है “
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == संशय : == जे किर किसीवलाई फलसंसईणो किसिं बिलंबंति। अविकलकारणभावे वि सस्सभागी न ते हुंति।। एवमणुट्ठाणमिणं फलसंसयगब्भिणं पकुव्वंता। दुक्करयं पि हु तप्फला विवज्जिया ते विसीयंति।। —कहारयणकोष : ६-७ जो लोग किसान हैं, वे फल में संशय रखते हुए यदि कृषि कर्म में विलम्ब करते हैं तो वे अविकल…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वंगा –Vangaa.: Name of a river of middle Arya Khand(region). मध्य आर्यखंड की एक नदी “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निशिक्त्त – Nishikta. Spread, Sprinkled, Percveded. व्याप्त किया हुआ, छिड़का हुआ “
दर्शन (उपयोग) Functional consciousness of conation vision attention. उपयोग का एक भेद , यह पदार्थ को सामान्य, अनाकार (निर्विकल्प) रूप से ग्रहण करता है, इसके चार भेद हैं (चक्षु, अचक्षु, अवधि, केवल)। [[श्रेणी: शब्दकोष ]] उपयोग का एक भेद; यह पदार्थ को सामान्य, अनाकार (निर्विकल्प) रूप से ग्रहण करता है, इसके ४ भेद हैं (चक्षु,…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शिखरनी – Shikharanee. A sweet dish (Shrikhand) prepared with curd and sugar etc. विशेष विधिपूर्वक दही में शक्कर, केशर, इलाइची आदि डालने से बना श्रीखंड “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निश्चल – Nishchala. Name of the 61st planet. 88 ग्रहों में 61वें ग्रह का नाम “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शास्त्रसार समुच्चय – Shaastrasaara Smuchchaya. Name of a book written by Maghnandi Yogindra. माघनंदि योगीन्द्र (ई. श. 12 उत्तरार्द्ध) कृत 196 संस्कृत सूत्र प्रमाण सिद्धांत ग्रंथ “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निश्चय विनय – Nishchaya Vinaya. Reverence with supreme purity of soul. शुद्धात्मा के प्रति विनम्रता, लीनता एवं शुद्धि निश्चय विनय है “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] वृंदावना –Vrindavana Name of the poet, the writer of ‘Vrindavan Vilas’ etc. many books. तीस चौबीसी पूजन, वृन्दावन, विलास, प्रवचनसार टिका अर्ह्त्पसकेवली आदि ग्रंथो के रचीयता एक कवि ” समय – ई. १८०३ – १८४८ “