निराभरण –!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निराभरण – Niraabharana. Compeletely freeness from all ornament (a characteristic of Jina-Lord idol). आभूषण से रहितता जिनप्रतिमाओं का एक लक्षण, जो राग अभाव का एक सूचक है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निराभरण – Niraabharana. Compeletely freeness from all ornament (a characteristic of Jina-Lord idol). आभूषण से रहितता जिनप्रतिमाओं का एक लक्षण, जो राग अभाव का एक सूचक है “
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == क्षणभंगुरता : == जन्म मरणेन समं, सम्पद्यते यौवनं जरासहितम्। लक्ष्मी: विनाशसहिता, इति सर्व भंगुरं जानीत।। —समणसुत्त : ५०७ जन्म मरण के साथ जुड़ा है और यौवन वृद्धावस्था के साथ। लक्ष्मी चंचला है। इस प्रकार (संसार में) सब कुछ क्षणभंगुर है।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सुवल्गु – Suvalgu Name of a region of western Videh. Name of a summit of Naggiri Vakshar (mountain) & its governing deity. अपर विदेहस्थ एक क्षेत्र (अपरनाम सुगन्धा ) । नागगिरि वक्षार का एक कूट व उसका स्वामी देव ।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निरर्थखण्डन – Nirarthakhandana. Rejoinder or refutation on the ground of meaningless. अर्थ-प्रयोजन रहित खंडन “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] वैक्रियिक शरीर नामकर्म प्रकृति –VaikriyikaSariraNamakarnnaPrakrti. A physique making Karmic nature of the formation of transformable body of deities & hellish beinghs. नामकर्म, जिसके उदय से विकार करने योग्य या बदलने योग्य देव या नारकियों का शरीर प्राप्त हो “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लोकसेन –Lokasena.: Name of the disciple of Achrya Gunbhadra. पंचस्तूप संघ की गुर्वावली के अनुसार आचार्य गुणभद्र के प्रमुख शिष्य ” आचार्य गुणभद्र रचित अधूरे उत्तरपूराण को पूर्ण किया ” समय –ई. 897-930 “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निरंतरबंधी प्रकृति – Nirantarabandhi Prakrti. Constant Karmic nature (reg. binding). जो प्रकृतियां अंतर्मुहूर्त आदि काल तक निरंतर रूप से बंधती है “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विपुलाचल – Vipulachala. Name of the first hill among five hills of Rajgrih Nagar. राजगृह नगर (नालंदा, बिहार ) की पंच पहाड़ियों में प्रथम पहाड़ी ” इंद्र ने भगवान महावीर के (केवलज्ञान होने के ६६ दिन पश्चात् ) प्रथम धर्मोपदेश के लिये यहां समवशरण रचा था “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सुरसा – Surasaa. Name of the female divinity of a peripatetic deity ‘Mahakal’. व्यंतरेन्द्र महाकाल की देवी ।