प्रतिलोम क्रम!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रतिलोम क्रम – Pratiloma Krama. Inverse order. विपरीत क्रम, विशेष की मुख्यता और सामान्य की गौणता करने से जो अस्ति-नास्ति रूप वस्तु प्रतिपादित होती है उसे प्रतिलोम क्रम कहते हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रतिलोम क्रम – Pratiloma Krama. Inverse order. विपरीत क्रम, विशेष की मुख्यता और सामान्य की गौणता करने से जो अस्ति-नास्ति रूप वस्तु प्रतिपादित होती है उसे प्रतिलोम क्रम कहते हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लक्ष्य लक्षण संबंध – संबंध का एक भेद। धर्म धर्मी में संबंध। Laksya Laksana Sambamdha-A relative factor
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रतिमा विज्ञान – Pratimaa Vigyaan. Iconography. प्रतिमा (मूर्ति) के नाप तौल आदि की जानकारी “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भवप्रत्ययिक – Bhavapratyayika. Inherent clairvoyance – a type of clairvoyance (Avadhigyan). अवधिज्ञान के दो भेदों में प्रथम भेद; इसके होने में मुख्य रूप से भव निमित्त होता है , देव – नारकी जीवों को यह ज्ञान जन्म से ही होता है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रतिभाग – Pratibhaaga. Division, portion. प्रत्येक भाग, हिस्सा “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लघिना ऋद्धि – विक्रिया ऋशि का एक भेद, जिस ऋशि के प्रभाव से साधु अपने षरीर को वायु से भी हल्का बनाने मेे समर्थ थे। Laghima Rdhhi-A type of super natural power pertaining to turning body lighter than air
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रतिबंधक – Pratibandhaka. Restrictive, One who makes an obstruction, an opposer. रोकने वाला या विरोधी कारण “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लब्धिविधान व्रत – तीन वर्श तक हरे भादों माघ व चैत्र मास में कृ अमावस को एकासन 1 से तीन को तेला तथा 4 को एकासन करना एवं षीलव्रत पालते हुए ऊँ हीं महावीराय नम की त्रिकाल जाप करना। Labdhividhana Vrata-A particular type of fasting or vow
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रतिनारायण – Pratinaaraayana. A type of great personages ( sahlaka purush), 9 Pratinarayan. नारायण के शत्रु-ऊर्ध्व लोक से आकर जन्म लेने वाले शलाका पुरुष जो नरकरूपी होते है ” यें संख्या में 9 होते हैं “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विर्यान्तराय कर्म –Viryamtaraya Karma. An obstructive Karma obscuring the vitality of beings of soul. जिस कर्म के उदय से आत्म वीर्य की रुकावट हो या जीव किसी कार्य के प्रति उत्साहित होने की इच्छा होते हुए भी उत्साहित नहीं हो पाता एवं असमर्थता का अनुभव करता हैं “