नीचोपपाद देव!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] नीचोपपाद देव – Neechopapaada. A type of peripatetic celestials. एक प्रकार की व्यंतरजातीय देव “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] नीचोपपाद देव – Neechopapaada. A type of peripatetic celestials. एक प्रकार की व्यंतरजातीय देव “
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == विरक्त : == भावे विरक्तो मनुजो विशोक:, एतया दु:खौघ—परम्परया। न लिप्यते भवमध्येऽपि सन् , जलेनेव पुष्करिणीपलाशम्।। —समणसुत्त : ८१ भाव से विरक्त मनुष्य शोक—मुक्त बन जाता है। जैसे कमलिनी का पत्र जल में लिप्त नहीं होता, वैसे ही वह संसार में रहकर भी अनेक दु:खों की परम्परा से…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निसृष्टार्थ – Nisrishtaartha. Best message conveyor. संदेशवाहक सर्वश्रेष्ठ दूत, कार्य में सफलता प्राप्त करना इसका उद्देश्य रहता है “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] ब्रह्मोत्तर (स्वर्ग) – Brahmottara (Svarga ). The sixth heaven. छठा स्वर्ग; इस कल्प में एक लाख ४ हजार विमान हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वचन प्रयोग कर्म – Vachan Prayoga karma.: A type of Prayoga karma (Pertaining to speech). प्रयोग कर्म के 3 भेदों में एक – जो संसार अवस्था में स्थित जीवों के और सयोग केवलियों के होता हैं “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भक्त – Bhakta. A devout, a devotee, a pious person, Some-thing divided or separated. धार्मिक, धर्म या धर्मगुरु के प्रति समर्पित व्यक्ति, गणित की भागाहार विधि में भाज्य राशी को भागहार द्वारा भक्त किया गया कहते हैं “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भद्रकलश – Bhadrakalasa. Name of the treasurer of Ram’. ८ वें बलदेव श्रीराम के कोषाध्यक्ष “
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मूलोत्तरप्रकृति–Mulottar Prakrati. Basic sub–karmic nature which are 148 in number. कर्मो की ज्ञानवरणादि 8मूलप्रकृति एवं इनके उत्तरभेद 148 मूलोत्तर प्रकृति कहलाती है”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वक्रग्रीव – Vakragriiv: The other name of Acharya Kund-Kund, Name of another great Acharya also. आचार्य कुंदकुंद का अपर नाम, अंगांशधारियों की परम्परा में एक आचार्य (ई.श. 12) “