जयनंदि!
जयनंदि The disciple of Devnandi & the spiritual teacher of Gurunandi. देवनंदि के शिष्य व गुरुनंदि के गुरु (वि. शक सं . ३०८-३५८)।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
जयनंदि The disciple of Devnandi & the spiritual teacher of Gurunandi. देवनंदि के शिष्य व गुरुनंदि के गुरु (वि. शक सं . ३०८-३५८)।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्व – Sra. Self, personal, own.अपना, निजी, आत्मपरक या अपनी जाति से संबंध रखने वाला।
दिग् विरति A vow of restriction pertaining to movement in particular direction. दशों दिशाओं में गमनागमन की मर्यादा करना। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
जयंता A city of Videh Kshetra (region), Name of a large well of Nandishvardvip (an island), Name of a female deity resident of Ruchak mountain. विदेह क्षेत्र की एक नगरी , नंदीश्र्वर द्वीप की एक वापी , रूचक पर्वत पर निवास करने वाली एक देवी का नाम।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्यादस्ति – Syaadasti The first Bhang of saptbhangi-exposition of the nature of the substance in the aspect of affirmation.सप्तभंगी के 7 भंगो मे प्रथम भंग-स्वद्रव्य, क्षेत्र, काल, भाव की अपेक्षा द्रव्य कथंचित् अस्ति रुप है।
दानवीर्य The main interrogator in the assembly of Lord Suparshvanath. सुपाश्र्वनाथ भगवान के समवसरण के मुख्य श्रोता (प्रश्नकर्ता) का नाम। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
जटायु The famous vulture related to mythology. सीता द्वारा वन म,एन श्री सुगुप्ती मुनि को आहारदान के समय वृक्ष पर बैठे गृद्ध पक्षी को जातिस्मरण हो आया . मुनिराज के चरण प्रक्षालन के जल के प्रभाव से उसका शरीर स्वर्णमाय बनम गया आयुर उसका नाम जटायु पद गया . मुनिराज के उपदेश से उसने अणुव्रत…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्याच्चेतन – Syaaccetana. Exposition of soul in the aspect of consiousness. चेतन स्वभाव प्रधानता की अपेक्षा जीव का कथन।
दश भक्ति The collection of different particular devotional prayers. प्राकृतभाषा की सिद्धभक्ति , श्रुतभक्ति, चारित्रभक्ति , योगभक्ति , आचार्यभक्ति , वर्तमान में उपलब्ध ये आठ भक्तियाँ ही आचार्य श्री कुन्दकुन्द स्वामी द्वारा रचित ‘‘दशभक्ति’’ नाम से प्रसिद्ध हैं । संस्कृत की चैत्यभक्ति एंव समाधिभक्ति ये 11 भक्तियाँ ‘‘दशभक्ति’’ नाम से प्रसिद्ध हैं। वर्तमान में पूज्य…
जघन्य वर्ग Minimum group or class of particles etc. जघन्य अनुभाग युक्त परमाणु को जघन्य वर्ग कहते हैं ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]