आरोप!
आरोप Allegation, Accusation, Blame. दोष लगाना अध्यारोपण एक वस्तु के गुणों को दूसरी वस्तु में आरोपित करना।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
आरोप Allegation, Accusation, Blame. दोष लगाना अध्यारोपण एक वस्तु के गुणों को दूसरी वस्तु में आरोपित करना।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संभिन्नमति – Sanbhinnamati. Name of a minister or counsellor of King Mahabal (the 10th past birth soul of Lord Risabhdev). तीर्थंकर ऋषभदेव के 10वें पूर्वभव के जीव राजा महाबल का एक मंत्री ” इसने राज्यसभा में नास्तिक मत की सिद्धि की थीं, अंत में मरकर निगोद में उत्पन्न हुआ “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्लोकवार्तिक – Shlokavaartika. Name of a commentary book on ‘Tattvarthsutra’ written by Acharya Vidyanandi Ji. आचार्य उमास्वामी कृत तत्त्वार्थसूत्र पर आचार्य विद्यानंद (ई. 775-840) कृत विस्तृत टीका “
एकपाश्र्वशययासन An austerity, sleeping with the single posture. किसी एक करवट से सोना।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्रेणिक – Shrenika. A Buddha king of Magadh country, who became Jaina later on, and ultimately became chief listener in the Samavsharan of Lord Mahavira, and he will be the first Teerthankar (Jaina-Lord) of future time. राजा उपश्रेणिक के पुत्र का नाम, मगध देश के राजा ” पहले बोद्ध थे बाद में अपनी रानी…
गणधर Chief disciple (Gandhar) of Teerthankar (Jaina lord). तीर्थंकर के प्रमुख शिष्य इनके अन्य नाम गणी, गणीश ,गणपति ,गणेश आदि भी हैं। ये समस्त श्रुत के पारगामी, सातों ऋद्धियों के धारक, मुनियों के स्वामी एवं चार ज्ञानधारी होते हैं। [[महावीर स्वामी के गणधर]] [[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्रुतग्रंथकृति – Shrutagranthakriti. The treatises with appropriate meanings. शब्द संदर्भ रूप अक्षरकाव्यों द्वारा प्रतिपाद्य अर्थ को विषय करने वाली जो ग्रंथरचना की जाती है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्रीवर्द्धन – Shreevardhana. The past-birth soul of omniscient Sanjayant. संजयंत केवली के पूर्वभव का जीव ” यह कुमुदावती नगरी का राजा था “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विशेष उपयोग – Vishesha. Special consciousness. ज्ञानोपयोग या साकारोपयोग, जो सामान्य – विशेशात्म्क पदार्थो के आकार को ग्रहण करे अर्थात् ज्ञान पदार्थो को विशेष करके जानता है “