सादिबंधी प्रकृति!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सादिबंधी प्रकृति – Saadibamdhee Prakrteei. A type of karmic nature with having property of rebinding. सम्यग्दर्शन को प्राप्त करने के उपरांत जो जीव गिरकर पुनः मिथ्यादृष्टि हो जाता है उसे सादि-मिथ्यादृष्टि कहते है।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सादिबंधी प्रकृति – Saadibamdhee Prakrteei. A type of karmic nature with having property of rebinding. सम्यग्दर्शन को प्राप्त करने के उपरांत जो जीव गिरकर पुनः मिथ्यादृष्टि हो जाता है उसे सादि-मिथ्यादृष्टि कहते है।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] वीतृरागता –Vitaragata. State of passionlessness, Freeness from worldly attachment.” सच्चे आप्त (भगवान) के तीन मुख्य गुणों सर्वज्ञंता, वीतरागता तथा हितोपदेशिता में से एक गुण ” जिसमें राग, द्वेष एवं मोह का अभाव होता है “
फ The 22nd consonant of the Devanagari syllabary. देवनागरी वर्णमाला का बाईसवाँ व्यंजन, इसका उच्चारण स्थान ओष्ठ है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
ऊहापोह Uncertainty, In-decision. हेतु का लक्षण अनिश्चय की स्थिति।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सागर सिद्व – Saagara Siddha. Beings to be salvated from ocean. समुद्र से सिद्व होने वाले जीव, ये स्तोक होते है।
ऊर्जयंत Called Girnar mountain in Junagarh of Saurashtra. गिरनार पर्वत जहाँ से श्री नेमिनाथ तीथंकर एंव शम्बू अनिरूध प्रद्युम्न सहित 72 करोड़ मुनि मोक्ष गये।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रघुवंश – इक्ष्वाकु वंष में उत्पन्न रघु राजा से इस वंष की उत्पत्ति हुई है। Raghuvamsa-Name of a dynasty
[[श्रेणी: शब्दकोष]]हेमराज पांडे – Hemaraaja Pande The disciple of pandit Rupchand, who wrote ‘Pravachansar Tika’ etc. great books. पंडित रुपचंन्द्र के शिष्य। कृतियाॅ-प्रवचनसार टीका, पंचास्तिकाय टीका, भाष्य भक्तामर, गोम्मटसार वचनिका, नयचक्र वचनिका। समय वि.श. 17-18।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लगड शय्यासन तप – कायक्लेष तप का एक भेद, षरीर को संकुचित करना। Lagada sayyasana tapa-A kind of austerity, sleeping with Shrunk limbs
[[श्रेणी: शब्दकोष]]हेतुत्व – Hetutva. Causative base. कारणपना, जैसे धर्म द्रव्य का लक्ष्ण गमन हेतुत्व है और जीव व पुद्गल के गमन मे धर्म द्रव्य सहकारी होता है।