रोगराहित्य!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रोगराहित्य – रोगरूपी बाधा का अभाव होना। अर्हत भगवान के देवकृत अतिषयों में एक अतिषय। समवषरण में सम्पूर्ण जीवों को रोग आदि की बाधाए नही होना। Rogarahitya-Devoid of disease, an excellence of lord Arihant
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रोगराहित्य – रोगरूपी बाधा का अभाव होना। अर्हत भगवान के देवकृत अतिषयों में एक अतिषय। समवषरण में सम्पूर्ण जीवों को रोग आदि की बाधाए नही होना। Rogarahitya-Devoid of disease, an excellence of lord Arihant
ईश्वरवाद Deism, Theism (related to faith in God). एक एकांत मत जो आत्मा को ज्ञान रहित व अनाथ एंव आत्मा के सुख-दुख स्वर्ग-नरकादि सर्व ईश्वर द्वारा किया मानता है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] राजवृत्ति – राजा का कार्य, पक्षपात हो कुल की मर्यादा, बुद्धि और अपनी रक्षा करते हुए न्याय पूर्वक प्रजा का पालन करना राजाओं की राजवृत्ति कहलाती है। Rajavrtti-Ruling duties of a king
तेरहपंथ A division of Jain (Digambar) religious comm-unity. दिगम्बर जैन सम्प्रदाय का एक विभाग । वर्तमान में दिगम्बर परम्परा में बीसपंथ और तेरहपंथ दो परम्पराएँ प्रचलित है। इनमें से बीसपंथ आगम सममत क्रियाओं को मानने वाला प्राचीन पंथ है एंव तेरहपंथ अनुमानित 400 वर्ष पूर्व कतिपय विद्वानों द्वारा स्थापित किया गया एक नया पंथ है।…
[[श्रेणी : शब्दकोष]] ममकार – Mamakara. My-ness , A feeling of mine with worldly objects. आत्मा से भिन्न पर पदार्थों में मेरेपन का भाव ममकार हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्रीकूट – Shreekoota. The 6th summit of Himvan Kulachal (mountain), Name of the 33rd city in south of Vijayardh mountain. हिमवान कुलाचाल का छठा कूट, विजयार्थ की दक्षिणश्रेणी का 33वां नगर “
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == सम्यक् दर्शन : == सम्मद्दंसणलंभो वरं खु तेलोक्कलंभादो। —भगवती आराधना : ७४२ सम्यक् दर्शन की प्राप्ति तीन लोक के ऐश्वर्य से भी श्रेष्ठ है। यथार्थतत्त्व श्रद्धा सम्यक्त्वम्। —जैन सिद्धान्त दीपिका : ५-३ जीवादि तत्त्वों की यथार्थश्रद्धा (सम्यक्—विचार) करना सम्यक् दर्शन है। दर्शनभ्रष्टा: भ्रष्टा:, दर्शनभ्रष्टस्य नास्ति निर्वाणम्। सिध्यन्ति चरितभ्रष्टा:,…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्रामण्य – Shraamanya. See – Shramana देखें – श्रमण ” निरुपराग ही श्रामण्य होता है “
देश A country, a part of earth. पृथिवी का वह भाग जिसका कोई विशिष्ट नाम हो और जिसके अंदर अनेक प्रदेश, ग्राम आदि हों, जैसे – भारत देश आदि ।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लाब्धिसम्पन्न ऋषि – सम्यग्दर्षन प्राप्ति का एक निमित लब्धिसम्पन्न ऋशियो का दर्षन। Labdhisampanna Rsi-Super saints, visiting of whom is a cause of right faith