भाषा पर्याप्ति काल!
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भाषा पर्याप्ति काल – Bhasha Paryaptikala. Period of vocal completion. भाषा पर्याप्ति पूर्ण होने पर जितने समय तक मन पर्याप्ति पूर्ण न हो तब तक भाषा पर्याप्ति काल कहलाता है “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भाषा पर्याप्ति काल – Bhasha Paryaptikala. Period of vocal completion. भाषा पर्याप्ति पूर्ण होने पर जितने समय तक मन पर्याप्ति पूर्ण न हो तब तक भाषा पर्याप्ति काल कहलाता है “
[[श्रेणी :शब्दकोष ]] मिश्र काल–Mishra Kaal. The time period upto the completion of body. जब तक शरीर पर्याप्ति पूर्ण ना हो तब तक का काल”
एकांग One organ activity (reverence with bending the head only). नमस्कार का प्रकार (केवल सिर झुकाना एकांग नमस्कार है)। [[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भव्य अलड्करण – Bhavya Alankarana. Great ornamentation. भव्यता के साथ सुशोभित करना “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भुतविषय नय – Bhutavishya.Naya. See- Bhutavishya.Naya. देखें – भूतग्राही नय “
एकादश अंगधर Jain Acharyas possessing knowledge of 11 Angas. 11 अंगधारी 5 आचार्य- नक्षत्र, यशपाल, पाण्डु, ध्रुवसेन, कंस।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी: शब्दकोष]] परंपरा लब्धि :Synonym of Shruggyan (scriptural knowledge.) श्रुतज्ञान का एक पर्यायवाची नाम ।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विपुलमति – Vipulamati. A type of telepathic knowledge (Manah Paryay Gyan). मन: पर्यय ज्ञान के दो भेदों में दूसरा भेद; जो ज्ञान दूसरे के मन में स्थित सरल और कुटिल सब बातों को जान लेता है ” अर्थात् चिन्तित, और अर्ध – चिन्तित को भी जान लेता है “
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मुष्टिविधान व्रत–Mushtividhan Vrat. A particular kind of vow of worshiping the Lord Arihant. प्रतिवर्ष भादो, माघ व चैत्र मास में अर्थात तीनों सोलहकारण पर्वो में क्र. 1 से शु. 15 तक पुरे–पुरे महीने प्रतिदिन 1 मुष्टि प्रमाण शुभ द्रव्य भगवान् के चरणों में चढ़ाकर अभिषेक व चातुविशति जिन पूजन करना” साथ ही ॐ…
[[श्रेणी: शब्दकोष]] पन्नालाल:A Pandit who wrote number of books. एक पंडित (ई0 1770-1840), उत्तरपुराण व राजवार्तिक की भाषा वचनिकाओं तथा विद्वद्जन बोधक आदि के कर्ता ।