जयवराह!
जयवराह A king of Saurashtra. पश्र्चिम में सौराष्ट्र देश का राजा (ई. ७७८-८०३)।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
जयवराह A king of Saurashtra. पश्र्चिम में सौराष्ट्र देश का राजा (ई. ७७८-८०३)।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्यादस्ति नास्ति अवक्तव्य – Syaadasti Naasti Avaktavya. The 7th Bhang of saptbhangi-expostion of the nature of the substance in the aspects of affimation, negation & indescribability.सप्तभंगी मे 7वां। स्वद्रव्य, चतुष्टय (द्रव्य, क्षेत्र, काल, भाव) की अपेक्षा से द्रव्य कथंचित् अस्तिरुप है, परद्रव्य चतुष्टय की अपेक्षा से वही द्रव्य कथंचित् नास्तिरुप है और दोने की…
जटासिंहनन्दि Name of an Acharya, the writer of ‘Varanga Charitra’ वरांग चारित्र के रचयिता एक आचार्य ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्याच्छुद्व – Syaacchuddha. Exposition of soul in the aspect of consiousness. केवलज्ञान अर्थात् स्वभाव प्राप्ति की अपेक्षा जीव का कथन।
जन्म Birth, Incarnation of soul. जीव के नवीन शरीर की उत्पत्ति होना जन्म कहलाता है . गर्भ , सम्मूर्छन उत्पाद के भेद से जन्म ३ प्रकार का होता है ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्मितयष – Smitayassa. The grand son of Bharat Chakravarti & the son of Arkkirti.इक्ष्वाकुवंषी भरत चक्रवर्तीं के पुत्र अर्ककीर्ति का पुत्र। अपने पुत्र को राज्य देकर दीक्षा ग्रहण कर मोक्ष प्राप्त किया।
जगती The world, the earth, Vedic metre. संसार , पृथ्वी , एक वैदिक छंद ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
दर्शन (उपयोग) Functional consciousness of conation vision attention. उपयोग का एक भेद , यह पदार्थ को सामान्य, अनाकार (निर्विकल्प) रूप से ग्रहण करता है, इसके चार भेद हैं (चक्षु, अचक्षु, अवधि, केवल)। [[श्रेणी: शब्दकोष ]] उपयोग का एक भेद; यह पदार्थ को सामान्य, अनाकार (निर्विकल्प) रूप से ग्रहण करता है, इसके ४ भेद हैं (चक्षु,…
ततक The first Patal (layer) of the 2nd hell. द्वितीय नरक का प्रथम पटल। [[श्रेणी:शब्दकोष]]