मूक दोष!
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मूक दोष–Muuk Dosh. A fault committed while paying reverence to Lord. वंदना के 32 दोषों में एक दोष; मन–मन में पढना ताकि दूसरा न सुने अतवा अथवा वंदना करते करते बीच–बीच में इशारे करना”
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मूक दोष–Muuk Dosh. A fault committed while paying reverence to Lord. वंदना के 32 दोषों में एक दोष; मन–मन में पढना ताकि दूसरा न सुने अतवा अथवा वंदना करते करते बीच–बीच में इशारे करना”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लौकातिक देव –Laukantika Deva.: A spacial type of heavenly deities who are supposed to get salvation definitely after crossing one birth or Bhav. पांचवे ब्रह्म स्वर्ग के अंत में रहने वाले लौकंतिक देव ;जिनके संसार या लोक का अंत निकट है वे लौकंतिक हैं ” ये देव दीक्षा कल्याणक के समय तीर्थंकर भगवान की…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रशमभाव-पंचेन्द्रियों के विषयों में शिथिल मन का होना ही प्रशम भाव कहलाता है”
[[श्रेणी : शब्दकोष]] प्रकीर्णक देव – Prakirnaka Deva. A type of deites (as common citizens). देवों के दश भेदों में से एक; जो देव प्रजा के समान होते हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निश्चय कर्ताकर्म – Nishchaya kartaakarma. A viewpoint of talking self as the doer of own pure volitions. आत्मा वास्तव में अपने शुद्ध भावों का कर्ता है एवं पुद्-गलद्रव्यके निमित्त से होने वाले भावों का कर्ता नहीं है “
त्रिगुणसार व्रत A country of Bharat kshetra in middle Arya Khand (region). क्रमशः 1,1,2,3,4,5,4,4,3,2,1 इस प्रकार 30 उपवास करना व णमोकार मंत्र का त्रिकाल जाप्य करना। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विदुर – Vidura. The younger brother of Dhritrashtra- Pandu of kaurav dynasty. कौरववंशी धृतराष्ट्र – पाण्ङू का छोटा भाई ” पाण्ङवों के परम हितैषी, अंत में मुनि विश्वकीर्ति से मुनि दिक्षा ली ” लाक्षा ग्रह में विदुर द्वारा बनवाई गई सुरंग से ही निकलकर पाण्ङवों की प्राण रक्षा हुई “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शहद – Shahada. Honey, which is not edible accoerding to Jaina philosophy. मधु; एक अभक्ष्य पदार्थ “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निशिभोजन कथा – Nishibhojana Kathaa. Name of a book written by poet Bharamal. कवि भारामल (ई.1756) द्वारा हिंदी भाषा में रचित कथा “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] नाभिगिरी – Nabhigiri Circular mountain at the center of Haimvata etc. areas भरत एरावत व विदेह छेत्र को छोड़कर शेष हेमवत आदि चार छेत्रों के मध्य भाग में गोल पर्वत ”