सर्वसाधु!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सर्वसाधु – Sarvasaadhu. Great Digambar Jain saints involved in spirituality. रत्नत्रय साधना में रत ढाई द्वीप संबंधी समस्त दिगम्बर जैन साधु । णमोकार मंत्र के पाॅंचवे पद में इन समस्त साधुओ को नमस्कार किया गया है।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सर्वसाधु – Sarvasaadhu. Great Digambar Jain saints involved in spirituality. रत्नत्रय साधना में रत ढाई द्वीप संबंधी समस्त दिगम्बर जैन साधु । णमोकार मंत्र के पाॅंचवे पद में इन समस्त साधुओ को नमस्कार किया गया है।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विषापहार स्तोत्र –VisapaharaStotra. A praising hymn written by Dhananjay (poet). धनज्ज्य कवि द्वारा रचित संस्क्रत भाषाबध्द एक स्तोत्र, रचना करते समय जिसके पाठ से उनके पुत्र का सर्प विष उतर गया था “
छिन्नगति A type of motion (reg. pervaded sound wave). गति का एक भेद ; मृदंग मेरी शंखादि के शब्द जो दूर तक जात्ये हैं , वे पुद्गलों की छिन्नगति हैं ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सर्वविद्याविराजिता – Sarvavidhyaaviraajitaa. See- Sarvavidyaaprakashinee. देखे – सर्वविद्याप्रकर्षिणी ।
चौइंद्रिय Four sensesd beings (reg. tasting, touching, smelling, seeing). स्पर्श , रसना , घ्राण , चक्षु इन्द्रिय वाले जीव चौइंद्रिय कहलाते हैं . कर्णइन्द्रिय , मन को छोड़कर इनके ८ प्राण होते हैं ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सर्वदोष त्याग – Sarvadosa Tyaaga. A great vow, complete renunciation of all 5 sins (violence, stealing etc.). महाव्रत। हिंसादि 5 पापों का पूर्णतः त्याग करना, इसका पालन मुनि करते है।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सर्पगुप्त – Sarvagupta. The spiritual teacher or Acharya Shivkoti name of the 26th chief disciple of Lord Rishbhdev, Name of the spiritual teacher of Acharya Mitranandi and an omniscient saint. भगवान आराधना के रचयिता आचार्य शिवकोटी के गुरु थे। समय ई.श. 1 का पूर्वपाद, भगवान वृषभदेव के 26 वें गणधर। आचार्य मित्रनंदि के गुरु।…
चित्रप्रभा A Patal (layer) of Saudharma heaven. सौधर्म स्वर्ग का एक पटल ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सराग सम्यग्दर्शन – Saraaga Samyagdarshana. Right perception with auspicious attachments. प्रशम, संवेग, अनुकम्पा और आस्तिक्य आदि गुणेां की अभिव्यक्ति लक्षणवाला सराग सम्यग्दर्षन है। प्रश्न (षुभ) राग सहित जीवो का सम्यत्तव सराग सम्यग्दर्शन हैं।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लिपिबद्ध – लिखा हुआ द्रव्यश्रुत जो 64 अक्षरो एवं पदो के द्वारा लिखा जाता है। Lipibaddha-Something put in writing form