उपान्त्य समय!
उपान्त्य समय Instant before the last time . अंतिम से पूर्व का समय।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
उपान्त्य समय Instant before the last time . अंतिम से पूर्व का समय।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
गूढ़दन्त Name of the 4th predestined Chakravarti (emperor). भविष्यकालीन चौथे चक्रवर्ती का नाम ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वर्द्धमानसागर (मुनि) – Varddhamaanasagar (Muni). Name of a Digamber Jain saint, the disciple of Charitra Chakravarti Acharya Shri Shantisagar ji Maharaj and the elder brother of his house hold life. चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शान्तिसागर जी महाराज के गृहस्थावस्था के बड़े भाई ,जिन्हें अत्यंत पुरुषार्थपूर्वक आचार्य श्री ने घर से निकालकर मुनिदीक्षा प्रदान कर…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पंचचारित्र सिद्ध – Panchachaaritra Siddha. Beings salvated due to five kinds of right conducts (in accordance with Bhutpragyapan Naya). भूतप्रज्ञापन नय की अपेक्षा पंच चारित्र से सिद्ध होने वाले जीव “
गजकुमार The son of Vasudeva and younger brother of krishna. अनंतकृत केवली वसुदेव का पुत्र, कृष्ण का अनुज, विरक्त होने पर जिसके ससुर सोमशर्मा ने क्रोध्हग्नी के कारन सर पर जलती हुई सिगडी रखी थी।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विवाहिता स्त्री – Vivahita Stri. Married Woman, accepted ritually. देवशास्त्रगुरु को नमस्कार कर तथा अपने भाई – बन्धुओं की साक्षीपूर्वक जिस कन्या के साथ विवाह किया जाता है वह विवाह स्त्री कहलाती है “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भाव मार्गणा – Bhava Margana. Psychical investigation. जिन भावों के द्वारा जीवों का अन्वेषण किया जाता है “
गति परिष्पंद Vibrational motion. बाह्य अभ्यंतर निमित्त के वश उत्पन्न होने वाला काय का परिस्पंद ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पंकभाग – Pankabhaaga. A part of Ratnaprabha earth of hell. अधोलोक में सबसे पहली रत्नप्रभा पृथ्वी के तीन भागों में दूसरा भाग जो पंक कहलाता है ” भवनवासी असुरकुमार एवं राक्षस जाति के व्यंतर देवों के भवन यहाँ बने हुए है “