ब्रह्मसेन!
[[श्रेणी : शब्दकोष]] ब्रह्मसेन – Brahmasena. Name of the preceptor of Acharya Veersen. आचर्य वीरसेन के गुरु तथा जयसेन जी के शिष्य (ई. १०१३ ) का नाम “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] ब्रह्मसेन – Brahmasena. Name of the preceptor of Acharya Veersen. आचर्य वीरसेन के गुरु तथा जयसेन जी के शिष्य (ई. १०१३ ) का नाम “
छिन्न निमित्त ज्ञान A type of symbolic knowledge. देव , दानव , राक्षस , मनुष्य और तिर्यंच के द्वारा छेड़े गए शस्त्र एवं वस्त्रादिक तथा प्रासाद , नगर और देशादिक चिन्हों को देखकर त्रिकालभावी शुभ, अह्सुभ मरण , विविध प्रक्लार के द्रव या और सुख-दुःख को जानना ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
तंत्र A charm and enchantment, a mystical formula for the attainment of super natural powers. जादू टोना, विद्या,मणि, मंत्र आदि की शक्ति। [[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] वोंडज –Vaindaja. Cotton cloths. वस्त्र के ५ भेदों, कपास से उत्पन्न वस्त्र वोंडज हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सर्वविजय – Sarvavijaya. Name of the 30th chief disciple of Lord Rishavhdev. भगवान ऋषभदेव के 30 वें गणधर ।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विभाव पुद्ग्ल – Vibhava Pudgala. Assimilated particles of any pudgal (matter). पुद्ग्ल द्रव्य की दो भेदों में एक भेद; परमाणु ‘स्वभाव पुद्ग्ल’ और स्कंध ‘विभाव पुद्ग्ल’ हैं “
चौरार्थादान Acceptance of stolen materials. अचौर्याणुव्रत का एक अतिचार ; चोरी का लाया हुआ माल लेना ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सर्वदर्शित्व शक्ति – Sarvadarshitva Sakti. One of the powers acquired by the soul, power of all-seeing. जीव की एक शक्ति । सकल विष्व के सामान्य भाव को देखने रूप से (अर्थात लोकालोक को सत्तामात्र ग्रहण करने रूप से ) परिणमित ऐसी आत्मदर्षनमयी सर्वदर्षित्व शक्ति है।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] वृद्धि – Vrddhi. Growth, Increase, Development विकास, बढ़ोत्तरी, पूर्व स्वभाव को कायम रखते हुए भावान्तररूप से अधिकता हो जाना व्रद्धि है”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सर्पगत – Sarvagata.. Omnipresent, all-pervading. सर्वव्याप्त-सभी जगह फैला हुआ। केवलज्ञान के सर्व लोकालोक को जानने के कारण जीव सर्वगत या सर्वव्यापी कहलाता है।