श्रद्धानवाद!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्रद्धानवाद – Shraddhaanavaada. A philosophical doctrine. एक एकांत मत दर्शन\वाद का नाम “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्रद्धानवाद – Shraddhaanavaada. A philosophical doctrine. एक एकांत मत दर्शन\वाद का नाम “
त्रयदंड Three types of punishment. मन-वचन – काय के अशुभ क्रिया रूप तीन दंड है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शोक वेदनीय – Shoka Vedaneeya. Karma causing sorrow or grief. मोहनीय कर्म के नोकषाय वेदनीय कर्म का एक भेद जिसके उदय से जीव शोक का वेदन (अनुभव) करता है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रशंसा- गुणों को प्रकट करने का भाव प्रषंसा है। Prasansa- Commendation, Admiration
फलरस Fruit juice, Fruitional power of Karmas. अंगूर, आम, आदि के रस । कर्मो की फल देने की शक्ति । [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
चन्द्रप्रज्ञप्ति A type of scriptural knowledge (Shrutgyan), A Shvetambar book and also the name of a book written by Acharya Amitgati. अंगश्रुत ज्ञान का एक भेद; इसमें की आयु , परिवार , ऋद्धि आदि का लाख ५००० पदों में वर्णन झाई , एक श्र्वेताम्बर ग्रन्थ एवं आचार्य अमितगति द्वारा रचित एक ग्रन्थ ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रत्याख्यानावरण कशाय- pratyakhyanavarana kasaya Passions obscuring or causing destruction of complete right conduct. जो कशाय सकल चारित्र का घात करे, इसके क्रोध आदि भेद है।
तैजस समुद्घात Electric overflow, Phosphorescent extrication. जीवों के अनुग्रह और विनाश में समर्थ तैजस शरीर की रचना के लिए तैजस समुदघात होता है। यह शुभ तैजस और अशुभ तैजस दो प्रकार का है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
तेररह Thirteen (13 types of faults and 13 types of conducts in Jainalogy). त्रयोदश पांच पाप, चार कषाय , जुगुप्सा , भय रति, अरति ये 13 दोष है, एंव पांच महावृत , पांच समिति और तीन गुप्ति इस प्रकार चारित्र के 13 भेद यप। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी :शब्दकोष]] यथातथानुपूर्वी–Yathatathanupurvi. See – Yatrattranupurvi. देखें –यत्रतत्रानुपूर्वी”