रूद्रवसंत व्रत!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रूद्रवसंत व्रत – क्रमष 2,3,4,5,6,6,4,3,2 इस प्रकार 35 उपवास करना।बीच के स्थानो में पारणा व नमस्कार मंत्र की त्रिकाल जाप करना। Rudravasamta Vrata-A specified procedural vow (fasting)
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रूद्रवसंत व्रत – क्रमष 2,3,4,5,6,6,4,3,2 इस प्रकार 35 उपवास करना।बीच के स्थानो में पारणा व नमस्कार मंत्र की त्रिकाल जाप करना। Rudravasamta Vrata-A specified procedural vow (fasting)
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शल्य – Shalya. Sting; thorn; something that causes pain to body or mind; anger, pride, illusion, greediness, love, lust, longings for next birth (Nidan) & wrong belief are 8 stings in this world. शल्य का अर्थ पीड़ा देने वाली वस्तु है ” अर्थात् शरीर और मन सम्बंधी पीड़ा का कारण, कर्मोदय जनित विकार या…
उपाधि Rank, Alien belonging, Attachment, Requisites. पदवी, संसार से मोह अर्थात साधन के साथ अव्यापक और साध्य के व्यापक हेतु को उपाधि कहा जाता है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शरीरसंघात नामकर्म – Shareera Sanghaata Naamkarma. Physique making Karmas causing association of body. जिसके उदय से औदारिक आदि शरीरों की छिद्र रहित होकर परस्पर प्रदेशों में एकरूपता आती है ” यदि शरीर संघात नामकर्म संज्ञा न हो तो तिल के मोदक के सामान शरीर अपुष्ट रहेगा “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निर्वृत्ति मार्ग – Nirvrtti Marga. Path of salvation. त्याग मार्ग,मुनि व त्यागी होने की तरफ चलना (महाव्रतों को धारण करना) “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संशय – Sanshaya. Doubt, Suspicion, Confusion. वस्तु के विषय में विरुद्ध अनेक धर्मों में से किसी एक का निश्चय नहीं कर पाना और संदेह में पड़ जाना ” जैसे- यह सीप है या चाँदी है ऐसा संदेह होना “
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == मानी : == योऽपमानकरणं दोषं, परिहरति नित्यमायुक्त:। सो नाम भवति मानी, न गुणत्यक्तेन मानेन।। —समणसुत्त : ८९ जो दूसरे को अपमानित करने के दोष का सदा सावधानीपूर्वक परिहार करता है, वही यथार्थ में मानी है। गुणशल्य अभिमान करने से कोई मानी नहीं होता।