हरिदवे (कवि)!
[[श्रेणी: शब्दकोष]]हरिदवे (कवि) – Harideva (Kavi). Name of an Apabhransh poet, the writer of ‘Mayanparajaya Cariu’. चंगदेव की सप्तम पीढ़ी मे उत्पन्न, मयणपराजय चरिउ के रचयिता एक सद्गृहस्थ अपभं्रष कवि।
[[श्रेणी: शब्दकोष]]हरिदवे (कवि) – Harideva (Kavi). Name of an Apabhransh poet, the writer of ‘Mayanparajaya Cariu’. चंगदेव की सप्तम पीढ़ी मे उत्पन्न, मयणपराजय चरिउ के रचयिता एक सद्गृहस्थ अपभं्रष कवि।
[[श्रेणी: शब्दकोष]]हरि क्षेत्र – Hari Ksetra. Name of the third region of Jambudvip (island) among all 7. जम्बूद्वीप के 7 क्षेत्रो मे तीसरा क्षेत्र, यहाॅ मध्यम भोगभूमि है।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] राजमल सत्यवाक्य – ई 816 – 830 के एक राजा का नाम।इनके राज्यकाल में ही आचार्य विद्यानंदी नं 1 के द्वारा आप्त परीक्षा प्रमाणपरीक्षा युक्त्यानुषासन गंरथ लिखे गए। Rajamalla Satyavakaya-Name of a king
[[श्रेणी: शब्दकोष]] परपक्ष दूषक:Blaming the opponent end.विरीत पक्ष की अवमानना करने वाला हेतु स्वपक्ष का साधक और परपक्ष का दूषक होना चाहिए ।
[[श्रेणी: शब्दकोष]]स्वास्थ्य – Svaasthya. A sound state of body, health. आरोग्य, मानसिक शांित। सांम्य, समाधि, योग, चित्तनिरोध, शुद्वोपयोग, स्वास्थ्य ये सब एकार्थवाची है।
[[श्रेणी: शब्दकोष]] परमणानुपस्थापन:A type of punishment ; procedural expulsion of a faulty saint without giving repentance. परिहार प्रायश्चित, आचार्य द्वारा अपने संघ के किसी दोषी साधु को बिना प्रायश्चित दिये अन्य संघ के आचार्य के समीप भेजना।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] राजमती विप्रलंभ – पं आषाधर द्वारा रचित एक संस्कृत गं्रथ।विशय – नेमिराजुल संवाद। Rajamati vipralambha-A book written by pandit Ashadharji
[[श्रेणी: शब्दकोष]]स्वानुंभव दर्पण – Svaanubhava Darpana. Name of a treatise written by Acharya Yogendudev. आचार्य योगेन्दुदेव (ई.श. 6) द्वारा विरचित अध्यात्म विषयक प्राकृत गाथाबद्व ग्रथ। इसमे 109 गाथाएॅ है।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] साकार मंत्रभेद – Saakaara Mantrabheda. An infraction of vow of true speech to expose the secret of other with the intention of their insult. सत्याणुव्रत का एक अतिचार, चर्चा वार्ता से अथवा मुख की आकृति आदि से दूसरे के मन की बात को जानकर इसलिए प्रकट कर देना कि उसकी बदनामी हो।