ऋतुविहीन फलोत्पत्ति!
ऋतुविहीन फलोत्पत्ति One of the super-natural happening of Tirthankars (Jaina-Lords), Unseasonal blossoming. तीर्थंकरों के 34 अतिशयों में देवकृत अतिशय-असमय में फूल-फूलों का वृद्धिंगत हो जाना।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
ऋतुविहीन फलोत्पत्ति One of the super-natural happening of Tirthankars (Jaina-Lords), Unseasonal blossoming. तीर्थंकरों के 34 अतिशयों में देवकृत अतिशय-असमय में फूल-फूलों का वृद्धिंगत हो जाना।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] साध्य – Saadhya. Something attainable or to be achieved. इष्ट, अबाधित, असिद्ध को साध्य कहते है (देखें -परीक्षामुख) ।
ऋजुकूला Name of the river on the bank of which Lord Mahavira attained omniscience. जिस नदी के किनारे भगवान महावीर को केवलज्ञान प्राप्त हुआ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
द्वीद्रिय जीव That which has two senses. जिन जीवों के स्पर्शन – रसना दो इन्द्रियां होती है, शंख कृमि आदि।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी: शब्दकोष]] परमावस्था:State of salvation.निश्चय मोक्षमार्ग का अपरनाम । सिद्वावस्था
[[श्रेणी:शब्दकोष]] साधर्म्य – Saadharmya. Parallelism, Means showing some existence. धर्म, गुण आदि की समानता । साध्य के आधार में जिसकी वृत्तिता निष्चित हो उसको साधर्म्य कहते है।
उदयसेन मुनि Name of a Jaina-saint. एक दिगम्बर मुनि पं. आशाधर के शिष्य।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सातिशय केवली – Saatisaya Kevale. A type of omniscient one. तीर्थकर प्रकृति रहित, 25 अतिशयो (केवलज्ञान, 14 देवकृत, 1 वज्रवृषभनाराच संहन), 4 प्रातिहार्य (छत्र, सिंहासन, भामंडल, दिव्यध्वनि), गन्धकुटी व अनन्त चतुष्टष् सहित सातिशय केवली होते है। अर्थात् अतिशय युक्त केवली को सातिशय केवली कहते है।
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मूर्च्छा–Muurchchha. Unconsciousness, Delusion, Attachment, Worldly, Worldly involvement. बेहोशी, मोह, जैनागमानुसार ‘मूर्च्छा’ परिग्रह या ममत्व भाव है”