श्लोकवार्तिक!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्लोकवार्तिक – Shlokavaartika. Name of a commentary book on ‘Tattvarthsutra’ written by Acharya Vidyanandi Ji. आचार्य उमास्वामी कृत तत्त्वार्थसूत्र पर आचार्य विद्यानंद (ई. 775-840) कृत विस्तृत टीका “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्लोकवार्तिक – Shlokavaartika. Name of a commentary book on ‘Tattvarthsutra’ written by Acharya Vidyanandi Ji. आचार्य उमास्वामी कृत तत्त्वार्थसूत्र पर आचार्य विद्यानंद (ई. 775-840) कृत विस्तृत टीका “
एकपाश्र्वशययासन An austerity, sleeping with the single posture. किसी एक करवट से सोना।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == मुमुक्षु : == मिच्छत्तासवदारं रुंभइ सम्मत्तदिढकवाडेण। हिंसादिदुवाराणि वि, दिढवयफलिहेहिं रुंभति।। —जयधवला : १-१०-५५ मुमुक्षु जीव सम्यक्त्व रूपी दृढ़ कपाटों से मिथ्यात्व रूपी आस्रव द्वार को रोकता है तथा दृढ़ व्रत रूपी कपाटों से हिंसा आदि द्वारों को रोकता है।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्रेणिक – Shrenika. A Buddha king of Magadh country, who became Jaina later on, and ultimately became chief listener in the Samavsharan of Lord Mahavira, and he will be the first Teerthankar (Jaina-Lord) of future time. राजा उपश्रेणिक के पुत्र का नाम, मगध देश के राजा ” पहले बोद्ध थे बाद में अपनी रानी…
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विरलन राशि – Viralana Rashi. Spreaded numbers in the form of 1. जिस संख्या को एक-एक करके फैला दिया जायें ” जैसे ४ का विरलन होगा १,१,१,१, “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्रुतग्रंथकृति – Shrutagranthakriti. The treatises with appropriate meanings. शब्द संदर्भ रूप अक्षरकाव्यों द्वारा प्रतिपाद्य अर्थ को विषय करने वाली जो ग्रंथरचना की जाती है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्रीवर्द्धन – Shreevardhana. The past-birth soul of omniscient Sanjayant. संजयंत केवली के पूर्वभव का जीव ” यह कुमुदावती नगरी का राजा था “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] प्रचुरसंख्यक – Prachura Samkhyaka. Abundant in numbers. अधिक संख्या में “
उपाध्याय जिन्हें ग्यारह अंग और चौदह पूर्वों का या उस समय के सभी प्रमुख शास्त्रों का ज्ञान है मुनि संघ में साधुओं को पढ़ाते हें, वे उपाध्याय [[परमेष्ठी]] कहलाते हैं। [[श्रेणी:शब्दकोष]] या Preceptor, Scriptural teacher . रत्नत्रय से संयुक्त जिनकथित पदार्थों के शूरवीर उपदेशक और निःकांक्ष भाव सहित ऐसे मुनिराज।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भाव संयोगपद – Bhava Samyogapada. Compound words showing passions. पद का एक भेद; क्रोधी, मानी, मायावी और लोभी इत्यादि नाम जो भावों के निमित्त से व्यवहार में आते हैं “