दृष्टिवाद!
दृष्टिवाद A type of scriptural knowledge (Shrutgyan). अंगप्रविष्ट श्रुतज्ञान का बारहवाँ भेद, जिसके ५ भेद हैं-परिकर्म, सूत्र, प्रथमानुयोग, पूर्वगत, चूलिका ।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
दृष्टिवाद A type of scriptural knowledge (Shrutgyan). अंगप्रविष्ट श्रुतज्ञान का बारहवाँ भेद, जिसके ५ भेद हैं-परिकर्म, सूत्र, प्रथमानुयोग, पूर्वगत, चूलिका ।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पांडुकवन:The fourth forest of sumeru mountain.सुमेरु पर्वत का चतुर्थ वन। इसमे 4 चैत्यालय है।
दृढ़राज्य Father’s name of Lord Sambhavnath. संभवनाथ तीर्थंकर के पिता का नाम (दृढ़राज)। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
दुस्वर नामकर्म Karmic nature causing bad voice. नामकर्म की एक प्रकृति जिसके उदय से स्वर खराब हो। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
दुर्भाषा Rude, Violent, Merciless & husky language. कर्कश, कटु, निष्ठुर, परकोपी, जीवों की हिंसा करने वाली आदि भाषा।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] परस्परोपग्रह:Mutual help, rendering help to one another.जीव द्रव्य का उपकार, आपस में एक दूसरे की सहायता करना । जैसे-गुरू ज्ञान आदि देकर शिष्य का उपकार करते है। तथा शिष्य गुरू की सेवा, आज्ञापालन आदि करके गुरू का उपकार करता है।
दीक्षा Initiation, Consecration for a religious ceremony, an act of undertaking religious observances. वैराग्य की उत्तम भूमिका को प्राप्त होकर अपने सब सगे संबधियों से क्षमा मांगकर गुरू की शरण में जाकर संपूर्ण परिग्रह का त्याग कर देना। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
दिव्यपाद Name of 23rd predestined Tirthankar (Jaina-Lord). जम्बूद्वीप भरतक्षेत्र में स्थित 23 वें भाविकालीन तीर्थंकर का नाम (हरिवंशपुराण के आधार पर ) दूसरे ग्रंथों में इनका नाम देवपाल है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
त्रिपंचाशत् भाव Fifty three types of subsidential disposition. जीवों के औपशमकादिभाव जो 53 प्रकार के हैं। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]