वीतराग स्तोत्र!
[[श्रेणी : शब्दकोष]] वीतराग स्तोत्र –VitaragaStotra. Name of a Sanskrit spiritual hymn. एक आध्यात्मिक संस्क्रत स्तोत्र ” शिवं शुध्द बुध्दं …………. चिदानंद रूपं णमो वितरागं “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] वीतराग स्तोत्र –VitaragaStotra. Name of a Sanskrit spiritual hymn. एक आध्यात्मिक संस्क्रत स्तोत्र ” शिवं शुध्द बुध्दं …………. चिदानंद रूपं णमो वितरागं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वंदनमाला –Vandanmaalaa.: An auspicious article,garland of flowers(to be hung at a door). लौकिक मंगलों में एक मंगल :24 तीर्थंकर वन्दनीय होते हैं ,इसलिए भरत चक्रवर्ती ने 24 कलियों वाली वंदनमाला मुख्य दरवाजे पर लगवाई थी “वर्तमान में भी मंदिरों के दरवाजों पर वंदनमाला लगाने की परम्परा है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निषेध – Nishedha. Negation, negative element, prevention. प्रतिषेध, रोकना, प्रतिषेधक नियम “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] व्यंतरदेव –Vyaintaradeva. Peripatetic deities ( Bhoot, Pishach etc.). किन्नर, किम्पुरुष, महोरग, गंधर्व, यक्ष, राक्षस, भुत और पिशाच ये ८ प्रकार के व्यंतर देव कहलाते हैं ” ये वैकिर्यिक शरीर के धारी होते हैं एवं इनके असंख्य भवनों में जिनमंदिर होते हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निषण्ण निषण्ण व्युत्सर्ग – Nishnna Nishnna vyutsarga. A type of bad meditative relaxation. कायोत्सर्गका एक भेद; बैठकर अशुभ ध्यान करना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शिक्षक – Shikshaka. Teacher, Religious preceptor-saints. गुरु, श्रुताभ्यास कराने वाले मुनि “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निश्चय षडावश्यक – Nishchaya Shadaavashyaka. Synonym word for Mokshamarg, path of salvation. निश्चय मोक्षमार्ग का एक अपरनाम “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शालिसिक्थ मत्स्य – Shalisiktha Matsya. A special type of aquatic being (Tandul Matsya). तन्दुल मत्स्य; इनका शरीर तण्डुल (चावल) के सिक्थ के प्रमाण होता है एवं स्वयंभूरमण समुद्र में रहने वाले महामत्स्य के कां का मेल खाकर जीवन निर्वाह करते हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निश्चय प्रत्याख्यान – Nishchaya Pratyaakhyaana. Absolute renunciation (to have real knowledge). मुनि अवस्था में अपने से भिन्न पदार्थों को पर जान उन्हें उसी समय छोड़ देना ” अतः वास्तव में ज्ञान ही प्रत्याख्यान है ऐसा निश्चय कर आत्मा में स्थिर हो जाना “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] मनोहर- Manohara. Beautiful, alluring, pleasing, A type of peripatetic deities, Name of initiation – forests of Lord Padmaprabh, Shreyansnath and Vasupujya. मनकोमोहितकरनेवाला , महोरगजातिकाएकव्यंतरदेव , एकवनजहाँतीर्थंकरपदमप्रभ, श्रेयांसनाथ , वासुपूज्यनेदीक्षालीथी “