उभयशुद्धि!
उभयशुद्धि सम्यग्ज्ञान का एक अंग व्यंजन और उसके वाच्य (अर्थ) अभिप्राय की शुद्धि उभयशुद्धि है। अपरनाम तदुभयशुद्धि।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
उभयशुद्धि सम्यग्ज्ञान का एक अंग व्यंजन और उसके वाच्य (अर्थ) अभिप्राय की शुद्धि उभयशुद्धि है। अपरनाम तदुभयशुद्धि।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वशवर्तिता – Vashavartitaa.: An example of power of Karmas, fruition of Karmas causing developments of sense organs. कर्म की बलवत्ता का एक उदाहरण; नाम कर्मोदय की वशवर्तिता से इन्द्रियां उत्पन्न होती है “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विविक्त वसतिका – Vivikta Vasatika. Lonely or isolated place (hermitage). एकांत , ध्यान आदि के योग्य पवित्र-निर्दोष, साधु के रहने का स्थान “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वर्धमानक – Vardhamaanaka. Name of the dancing hall of Chakravarti (emperor) Bharatesh. चक्रवर्ती भरतेश की नृत्यशाला “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पंचचूलिका – Panchachoolikaa. Five subkinds of scriptural knowledge (shrutgyan). श्रुतज्ञान के 12वें दृष्टिवाद अंग प्रभेद; जलगता, स्थालगता, मायागता, रुपगता एवं आकाशगता चूलिका “
द्वितीय संग्रह कृष्टि A type of krishti-gradual destruction of karmas. 4 कषायों की तीन- तीन कृष्टी होती हैं इस तरह संग्रहकृष्टि 12 होती हैं, उनमें दूसरी कृष्टि।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सूर्यवंश – Suryavansha. One of the Branch of Ikshvaku Dynasty initiated from Arkkirti. इक्ष्वाकु वंश की दो शाखाओं में एक शाखा सूर्यवंश की शाखा भरत चक्रवर्ती के पुत्र अर्ककीर्ति से प्रारम्भ हुई क्योकि अर्क नाम सूर्य का है।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पंच उदुंबर फल – Pancha Udumbara Fala. Five kinds of figs oe non-edible fruits of ficus genus class. अभक्ष्य; बड़, पीपल, उम्र, कठूमर, पाकर इनमें निरंतर त्रस जीवों की उत्पत्ति होने से अभक्ष्य है “
द्वारापेक्षण To wait at the door to offer food to any recipient (saint etc.). आहार दान के लिए द्वार पर पात्र की राह देखते हुए खड़े होना।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी :शब्दकोष]] यंत्रशाला– Yantrashala Name of a part of the palace of residential deities. भवनावासी देवो के भवनों में एक गृह”