नैरन्तर्य!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] नैरन्तर्य – Nairantarya. Continuousness, Constancy. निरंतर होने का भाव, निबार्धता “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] नैरन्तर्य – Nairantarya. Continuousness, Constancy. निरंतर होने का भाव, निबार्धता “
आनंद पाहुड़ Literature devoid of spiritual knowledge. राग-द्वेष रहित जिन भगवान द्वारा निर्दिष्ट निर्दोष आचार्य परम्परा से प्राप्त 12 अंगों के वचनों का समुदाय अथवा उनका एकदेश परमानंद दो ग्रन्थिक पाहुड़ है उसके अतिरिक्त शेष जिनागम आनन्द पाहुड़ है। (कषाय पाहुड़ से)। [[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वज्रपंजरस्तोत्र –Vajrapanjra Stotra A protecting spiritual hymn. पंचपरमेष्ठी की स्तुति रूप एक रक्षा स्तोत्र “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] नेमिप्रभु – Nemiprabhu. Name of the 16th Tirthankar (jaina laord) situated in Videh Kshetra (region). विदेह क्षेत्र विद्यमान 20 तीर्थंकरों में 16 वें तीर्थंकर का नाम “
गतिनामकर्म प्रकृति Karmic nature causing any Gati. जिस कर्म के उदय से जीव मनुष्य, तिर्यंच, देव व नरक गति को प्राप्त करता है ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शीर्ष प्रहेलिका – Sheersha Prahelikaa. A type of time unit. काल का एक प्रमाण; लता, प्रयुत, महाऊह या शीर्षप्रहेलिका “
गणधरवलय यन्त्र A type of metallic plate engraved with some auspicious and mystic words. धातु की एक मंत्र लिखित प्लेट ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] नील लेश्या – Neela Leshyaa. Blue thought colouration or aura (related to worldly Passions). अशुभ भाव जो तीव्र कषय से हो; अतिलोभ, चपलता, अनृत भाषण, माया, तृष्णा, परवंचना, आलस्य, मूर्खता आदि नील लेश्या के लक्षण है “
उद्भ्रान्त Astray, Erring, Confused,Name of the fifth Patal (layer) of the first hell. भ्रमित होना प्रथम नरक का पाँचवा पटल।[[श्रेणी:शब्दकोष]]