रक्षा!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रक्षा – देखभाल, सुरक्षा अहिंसा, मन वचन काय की क्रिया देखभाल कर, करना जिससे जीव घात न हो, पिषाच व्यंतरो का दूसरा भेद। Raksa-To protect all living beings, defence, non-violence, A type of peripatetic deity (Pishach)
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रक्षा – देखभाल, सुरक्षा अहिंसा, मन वचन काय की क्रिया देखभाल कर, करना जिससे जीव घात न हो, पिषाच व्यंतरो का दूसरा भेद। Raksa-To protect all living beings, defence, non-violence, A type of peripatetic deity (Pishach)
[[श्रेणी: शब्दकोष]]हैरण्यवत् – Hairanyavat. Name of the summits of Ruchak & Shikhari mountains and of their deities. रुक्मि पर्वतस्थ एक कूट व उसका स्वामी देव, षिखरी पर्वतस्थ एक कूट व उसका स्वामी देव।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रत्नवृष्टि – रत्नवर्शा तीर्थकरों के गर्भावस्था में आने के 6 महीने पहले से जन्म पर्यन्त 15 मास तक जो कुबेर माता के आंगन मे रत्नो की वर्शा करते है। Ratnavrsti-Divinely rain of jewels (an auspicious event pertaining to the birth of Jaina lord)
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विशालाक्ष – Vishalaksha. Name of the 63rd son of king Dhritrashtra, Name of the Nagendra deity of Sphaticprabh summit of kundal mountain, Name of the 65th chief disci-ple of Lord Rishabhdev. राजा धृतराष्ट्र व रानी गांधारी का ६३ वां पुत्र, कुण्डल पर्वत के स्फटिक प्रभ कूट का स्वामी नागेन्द्र देव, भगवान वृषभदेव…
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भविष्याभाव संबंध – Bhavisyabhava Sambamdha. A type of relation pertaining to future. संबंध के अनेक भेड़ों में एक भेद “
[[श्रेणी: शब्दकोष]]हुंडावसर्पिणी – Humdaavasarpinii. A period of Avasarpini Kal (Avasarpinii Kaala) i.e. period of downfall in which extraordinary events take place. असंख्यात अवसर्पिणी-उत्सर्पिणी काल बीत जाने पर एक हुण्डावसर्पिणी काल आता है। इसमें विशेष बाते होती हैः जैसे चक्री का अपमान, तृतीय काल मे तीर्थकर का उत्पन्न होना, तीर्थकर पर उपसर्ग होना आदि।
[[श्रेणी: शब्दकोष]] परमज्ञान:Supreme knowledge, see-Parama Advaita.केवलज्ञान, देखें -परम अद्वैत ।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] योगसार – आचार्य यागेन्दु देव द्वारा रचित 108 दोहा प्रमाण अपभ्रंष अध्यात्मिक ग्रंथ। Yogasara-Name of the treatise
[[श्रेणी: शब्दकोष]]हिंजरी संवत् – Hijarii Sammvat. The muslim era. इस संवत् का प्रचार मुसलमानो मे है, क्योकि यह उनके पैगम्बर मुहम्मद साहब के मक्का मदीना जाने के समय से उनकी हिजरत मे विक्रय संवत् 650 मे अर्थात् वीर निर्वाण के 1120 वर्ष पश्चात् स्थापित हुआ था। इसी को मुहर्रम या शाबान सन् भी कहते हैं।