लोकोत्तर शरण!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लोकोत्तर शरण –Lokottara Sharan The supreme resort ,the shelter of Panch Parmeshthis . पंच परमेष्ठी आदि लोकोत्तर शरण हैं “जिनकी शरण लेकर लोक अर्थात् संसार को पार किया जाता है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लोकोत्तर शरण –Lokottara Sharan The supreme resort ,the shelter of Panch Parmeshthis . पंच परमेष्ठी आदि लोकोत्तर शरण हैं “जिनकी शरण लेकर लोक अर्थात् संसार को पार किया जाता है “
उत्सर्गलिंग Form of unclothedness (of Digambar Jaina saints). जैन साधु का द्रव्य (दिगम्बर) लिंग।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विहायोगति (नामकर्म) –Vihayogati (Namakarma). A type of karmic nature causing spatial move-ment. नामकर्म की एक प्रकृति, जिसके उदय से जीव का आकाश में शुभ व अशुभ गमन हो “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भंग विचय – Bhamga Vicaya. A type of disquisition door. एक अनुयोगद्वार; जो मार्गणाओं के विच्छेद और विच्छेद के अस्तित्त्व प्ररुपक है “
दण्डकारणिक An administrator who can punish, A magistrate. दण्ड देने वाला अधिकारी । [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] बुद्धि ऋद्धि – Buddhi Riddhi Supernatural power of intellect. एक प्रकार की ऋद्धि जिसके १८ भेद हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रावण – 8 वा प्रतिनारायण राजा रत्नश्रवा व रानी कैकसी का पुत्र अपरनाम दषानन। यह लंका का राजा था इसकी 18 हजार रानियां थी। जैन धर्म के अनुसार सीता का हरण कर नारायण लक्ष्मण के हाथों मरकर तीसरे नरक गया। Ravana-The 8th Pratinarayan, The son of the king ratnasharva his other name was dashanan
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निर्वहण – Nirvahana. Acquiring right fait and other virtues with calmness (free from anxiety). सम्यग्दर्शन आदि गुणों को निराकुलतासे धारण करना परीषहादिक आने पर व्याकुल चित्त न होकर सम्यग्दर्शन आदि रत्नत्रय में तत्पर रहना “