शुभ उपयोग!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शुभ उपयोग – Shubha Upayoga. Auspicious and right conduct. दया, दान, पूजा, व्रत, शील आदि रुपराग और चित्त-प्रसाद रूप परिणाम होना शुभोपयोग है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शुभ उपयोग – Shubha Upayoga. Auspicious and right conduct. दया, दान, पूजा, व्रत, शील आदि रुपराग और चित्त-प्रसाद रूप परिणाम होना शुभोपयोग है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सुलोचन -Sulochana. One with attracting eyes, The 20th son of king Dhritrashtra. सुन्दर नेत्रों वाला, राजा धृतराष्ट्र एवं रानी गांधारी का 20 वाॅं पुत्र ।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भावस्तवन – Bhavastavana. Eulogical praising of Lord Jinendra. जिनेन्द्र भगवान के गुणों का स्मरण करना “
चतुर्दश मार्गणा Fourteen ways of soul quest. १४ मार्गणा ; गति , इन्द्रिय , काय , योग , वेड , कषाय ,ज्ञान ,संयम ,दर्शन , लेश्या , भाव्यत्व , सम्यक्त्य्व , संज्ञित्व , आहार ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] समय भूषण – Samaya Bhooshana. Name of a composition composed by Acharya Indranandi. आचार्य इन्द्रनंदि (ई.श. 10-11) की एक रचना।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विदारण क्रिया – Vidarana Kriya. Exposing others’ sinful activities. साम्परायिक आस्रव की १८ वीं क्रिया ” दुसरे ने जो सावध कार्य किया हो उसे प्रकाशित करना “
चारणा Name of the chief Aryika (Ganini) in the assembly of Lord Shreyansanath. श्रेयांसनाथ भगवान के समवशरण की मुख्य गणिनी आर्यिका का नाम . दूसरा नाम ‘धारणा’ भी इंगित है ।।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी: शब्दकोष]] मध्यम पद – Madhyam pad. A large syllaberic term. 16348307888 अक्षर के पद को मध्यम पद कहते हैं ” अंगो तथा पूर्वो के पदों की संख्या इसी पद से परिगणित होती है “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] ब्रह्मचर्य प्रतिमा – Brahmacarya.Pratima. Seventh model stage of celibacy of Jaina lay- follower. श्रावक की सातवीं प्रतिमा; इसमें श्रावक स्त्रीमात्र का त्याग होकर पूर्ण ब्रह्मचर्य से रहता है ” इसका धारक श्रावक अपने पुत्र – पुत्रियों के विवाह के अतिरिक्त अन्य किसी के विवाह की अनुमोदना नहीं करता है “
ग्रीवोन्नमन An infraction in the posture of meditation. कायोत्सर्ग का एक अतिचार ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]