निश्चय समिति!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निश्चय समिति – Nishchaya Samiti. Absolute behaviour. अपने स्वरुप में सम्यक् प्रकार से गमन अथवा परिणमन करना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निश्चय समिति – Nishchaya Samiti. Absolute behaviour. अपने स्वरुप में सम्यक् प्रकार से गमन अथवा परिणमन करना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शाश्वत सुख – Shashvata Sukha. Supreme or enternal bliss. अनंत सुख ” अर्थात सूक्ष्म लोभ का नाश होने से जो सूक्ष्म परिणाम शेष रह जाते हैं वह सूक्ष्म चरित्र है वह शाश्वत सुख का स्थान है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निश्चय प्रोषधोपवास – Nishchaya Proshadhopavaasa. Engrossment into self with renouncing all kinds of food taking. मुनि अवस्था में चतुर्विध आहार छोड़कर आत्मा के ध्यान में निमग्नहोना “
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मूर्तिक पदार्थ–Muurtik Padarth. Tangible matters, which can be touched, tested & felt etc. रूपी पदार्थ जिसमे स्पर्श, रस, गंध, वर्ण गुण पाए जाते है”
गंधदेव A protector deity of Nandishvar dvip (island) and kshaudravar. नन्दीश्वर द्वीप तथा क्षौद्रवर का रक्षक देव । [[श्रेणी:शब्दकोष]]
देवदत्ता A reverential palanquin (pertaining to Lord Vimalnath). एक पालकी तीर्थंकर विमलनाथ इसी पर आरूढ़ होकर दीक्षा लेने हेतु सहेतुक वन गये थे। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शांतिसागर परम्परा – Shantisaagar Paramparaa. The tradition of first Digambar Jain Acharya Charitra Chakravarti Shri Shantisaagarji Maharaj of 20th century, the renovator of Jaina asceticism of new age. बीसवीं सदी के प्रथम दिगम्बर जैनाचार्य चरित्र चक्रवर्ती श्री शांतिसागर जी महाराज ने चूँकि इस युग में मुनिपरम्परा को पुनः जीवंत कर चतुर्विध संघ परम्परा को…
चक्षुदर्शन Visionary conation, ocular perception. चक्षु इन्द्रिय के द्वारा पदार्थ का ज्ञान होने से पूर्व जियो सामान्य प्रतिभास होता है वह चक्षुदर्शन है ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निश्चय आलोचना – Nishchaya – Aalochanaa. Absolute introspection. जीव द्वारा परिणामों को समभाव में स्थापित कर निज आत्मा में तन्मय होना निश्चय आलोचना है”यह मुनि अवस्था में घटित होती है “