वरधर्म!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वरधर्म – Varadharma.: Past-birth-father of Lord Mallinath,Name of a saint possessing super power. तीर्थंकर मल्लिनाथ के पूर्वभव के पिता का नाम , एक चारणऋद्धिधारी मुनि; जीवंधर ने इन्हीं से व्रत लिए थे “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वरधर्म – Varadharma.: Past-birth-father of Lord Mallinath,Name of a saint possessing super power. तीर्थंकर मल्लिनाथ के पूर्वभव के पिता का नाम , एक चारणऋद्धिधारी मुनि; जीवंधर ने इन्हीं से व्रत लिए थे “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पार्श्वनाथ प्रतिमा – Parsvanatha Pratima. Symbolic idol of Lord Parshvanath (with expanded snake- hood). सर्प के फण से युक्त पार्श्वनाथ भगवान की प्रतिमा होती है “
[[श्रेणी: शब्दकोष]] पद्माल:A city in the north of Vijayardh (mountain). विजयार्ध की उत्तर श्रेणी का एक नगर ।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] ब्रह्मचर्याणुव्रत – Brahmacaryanuvrata. Vow of partial celibacy, to limit the desires with own wife only. ५ अणुव्रतों में व्रत; एक देश ब्रम्हचर्य पालना अथवा स्वदारसंतोंष रखना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वनजीविका – Vanajivika: Livelyhood by forest product. सावद्य, खरकर्म के 15 भेदों में एक भेद ;स्वयं टूटे हुए अथवा तोड़कर वृक्ष आदि वनस्पति को बेचना आदि “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] वृक्ष –Vrksa Trees (myth, wish fulfilling trees, specific super trees). कल्पवृक्ष; भोग भूमि में मुनष्य की आवश्यकताओं को चिंता मात्र से पूरी करते हैं ” चैत्यवृक्ष; प्रेतिमाओ के आश्रयभूत, जो पृथिवीकायिक होते हैं, वनस्पतिकायिक नहीं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पद्मवान् : Name of a region of Western Videh (region), A summit of Vikritvan Vakshar, Nabhigiri mountain of Ramyak Kshetra (region) अपर विदेह स्थित एक क्षेत्र, विकृतवान् वक्षार का एक कूट, रम्यक क्षेत्र का नाभिगिरी ।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भाव अस्तित्व – Bhava Astitva. A property of matter related to its eternal exist- ence. द्रव्यों के ६ सामान्य गुणों में एक गुण, जिसके निमित्त से द्रव्य का कभी नाश नहीं होता “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भाव स्पर्श – Bhava Sparsa. Sensible touch for any knowledgeable matter. निक्षेप रूप एक भेद; जो स्पर्श प्राभृत का ज्ञाता उसमें उपयुक्त है वह सब भाव स्पर्श है \
[[श्रेणी:शब्दकोष]] नोकर्माहार – Nokarmaahaara. See – Nokarma Aahaara. देखें – नोकर्म आहार “