भावपुण्य!
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भावपुण्य – Bhava Punya. Auspicious thought- activity of soul. दान, पूजा षडावश्यकादि रूप जीव के शुभ परिणाम भावपुण्य हैं “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भावपुण्य – Bhava Punya. Auspicious thought- activity of soul. दान, पूजा षडावश्यकादि रूप जीव के शुभ परिणाम भावपुण्य हैं “
[[श्रेणी :शब्दकोष]] यज्ञ दीक्षा–Yagya Deeksha. Consecrational–initiation; giving particular vows to worshippers for a particular time period of Panch–Kalyanak, Vidhan etc. to become Indras by the Partishthacharya. पंचकल्याणक प्रतिष्ठा; इन्द्रध्वज विधान आदि में इन्द्रो (यजमान) के लिए कराई जाने वाली एक विशष विधि; जिसमेहाथ में कंकण बांधकर पूजापर्यन्त ब्रह्मचर्य व्रत, एकासन आदि का नियम कराया जाता…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पंच अनुत्तर विमान – Pancha Anuttara Vimaana. Five supreme heavenly aboding places. 9 अनुदिशों के ऊपर विजय, वैजयंत, जयंत, अपराजित और सर्वार्थसिद्धि विमान “
[[श्रेणी: शब्दकोष]] परगण चर्या:To join other group of saints by a saint after leaving own group. साधु आदि द्वारा अपना संघ छोडकर अन्य संघ में जाना ।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भवाध्दा – Bhavaddha. A measure related to a life course. भव सम्बंधी काल के प्रमाण को भवाद्धा कहते हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सूत्रसम्यक्त्वार्य – Sutra Samayaktvaarya. See- Sutra Darsanaarya. देखे – सूत्रदर्षनाय ।
टंकण A city near Girikuta mountain and Eravati river, To do typing. ऐरावती नदी व गिरिकूट पर्वत के निकट स्थित एक नगर, टाइप करना। [[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मुख्यकाल–Mukhyakaal. A type of prime period of time. वर्तना लक्षण काल का प्रथम भेद; गौण काल की प्रवृत्तिइसी काल के कारण होती है”
[[श्रेणी : शब्दकोष]] मनुष्य- Manushya. Human beings. मनुष्य गति में उत्पन्न हित अहित विवेक को धारण करने वाला , व्याकरण की व्युत्पत्ति ‘मनोरपत्यंमानवाः’ के अनुसार मनु की संतान “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प – Pa. The 21st consonant of the Devanagari Syllabary. देवनागरी वर्णमाला का 21 vanवाँ व्यंजन, इसका उच्चारण स्थान ओंठ है “