लाटी संहिता!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लाटी संहिता – श्रावकाचार विशयक पडित राजमल्ल कृत ग्रथ इसमें सात सर्ग एवं 1400 ष्लोक हैं। Lati Samhita-Name of a treatise written by Pandit rajmalla
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लाटी संहिता – श्रावकाचार विशयक पडित राजमल्ल कृत ग्रथ इसमें सात सर्ग एवं 1400 ष्लोक हैं। Lati Samhita-Name of a treatise written by Pandit rajmalla
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रूद्रवसंत व्रत – क्रमष 2,3,4,5,6,6,4,3,2 इस प्रकार 35 उपवास करना।बीच के स्थानो में पारणा व नमस्कार मंत्र की त्रिकाल जाप करना। Rudravasamta Vrata-A specified procedural vow (fasting)
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संशय – Sanshaya. Doubt, Suspicion, Confusion. वस्तु के विषय में विरुद्ध अनेक धर्मों में से किसी एक का निश्चय नहीं कर पाना और संदेह में पड़ जाना ” जैसे- यह सीप है या चाँदी है ऐसा संदेह होना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सामान्य केवली – Saamaanya Kevalee. A type omniscient. केवली के 7 भेदो में एक भेद; सामान्य मुनि अवस्था से केवलज्ञान को प्राप्त करने वाले ।
ऋजुसूत्रनय Straight view point (related to present). जो नय केवल वर्तमान काल संबंधी पर्याय को ग्रहण करता है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
उदुम्बरी A river of Bharat Kshetra (a region). भारत क्षेत्र की एक नदी।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
एकजीव The being (reg. soul), A type of disquisition door (Anuyogdvar). अनुयोगद्वार का एक भेद।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लब्धिसार टीका – आचार्य नंेतिचन्द्र कृत संस्कृत संजीवनी टीका तथा पं टोडरमल कृत भाशा टीेका। Labdhisara Tika-name of a commentary book written by Acharya Nemichandra and by pandit Todarmal