तत्वरूचि!
तत्वरूचि Reverence with interest for tattvas. सम्यग्दर्शन तत्व श्रद्धान या ततवों के प्रति रूचि होना। [[श्रेणी:शब्दकोष]]
तत्वरूचि Reverence with interest for tattvas. सम्यग्दर्शन तत्व श्रद्धान या ततवों के प्रति रूचि होना। [[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निचैर्वृत्त्ति – Nichairvritti. Politeness, Meekness. नम्र वृत्ति, नम्रता” जो गुणों में उत्कृष्ट है उनके प्रति विनय अथवा नम्रता से रहना “
उद्योत Cold effulgence, Radiance, Lustre. चन्द्रमा मणि (चन्द्रकांत मणि) जुगनू आदि के निमित्त से जो प्रकाश पैदा होता है। उसे उद्योत कहते हैं।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शिव – Shiva. Name of the 13th Tirthankar (Jain-Lord) of past time, Name of a door of samavsharam(assembly of lord). भूतकालीन तेरहवें तीर्थंकर, समवशरण के तीसरे कोट के दक्षिण द्वार का नाम “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भग्नघट श्रोता – Bhgnaghata Srota. A type of false listener. अपात्र श्रोता का एक भेद; फूटे घड़े की तरह होना जिसमें उपदेश नहीं ठहरता “
चन्द्रनखा Preceptor of Bhagvati Aradhanakar Shivarya, Preceptor of Kumarnandi. रत्नश्रवा की पुत्री और रावण की बहन जिसने रावण की मृत्यु पर दीक्षा धारण की ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वचन प्रत्याख्यान – Vachan Pratyaakhyaana.: Utterance for not repeating something wrong. प्रत्याख्यान (त्याग) का एक भेद; में भविष्य में अपने व्रतों में अतिचार नहीं लगाऊंगा ऐसा बोलना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निष्प्राण – Nishpraana. Lifeless. निर्जीव अर्थात् जिसमें प्राण न हो “
गोत्र Race, Clan, An exogamous subdivision of a caste. संतानक्रम से चला आया आचरण जो उच्च और नीच कहा जाता है या उच्च-नीच कुल में उत्पन्न होता है ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वक्ता –Vaktaa: Orator , Speaker , Instructor ,One well –versed in scriptures . शास्त्रों का व्याख्याता ;सर्वज्ञ तीर्थंकर केवली .श्रुतकेवली और आरातीय आचार्य वक्ता के तीन भेद हैं ” सामान्य रूप से किसी भी भाषण करने वाले को भी वक्ता कहते हैं “