गुणश्रेणी शीर्ष!
गुणश्रेणी multiple progression top. सम्यक्त्व प्रकृति के अंतिम स्थितिकांडक की जब यक जघन्य स्थिति का अंतिम समय प्राप्त नहीं होता है वह स्थिति गुणश्रेणी शीर्ष कहलाती है ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
गुणश्रेणी multiple progression top. सम्यक्त्व प्रकृति के अंतिम स्थितिकांडक की जब यक जघन्य स्थिति का अंतिम समय प्राप्त नहीं होता है वह स्थिति गुणश्रेणी शीर्ष कहलाती है ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पूर्वविदेह – Poorvavideha. The regien in the east of Sumeru mountain (the eastern part of Videh Kshetra region). सुमेरु पर्वत की पूर्व दिशा में स्थित कच्छादि 16 क्षेत्रों को पूर्व विदेह कहते हैं “
तीन Three (three jewels of Jain philosophy etc.). एक संख्या , तीन लोक , तीन चैबीसी , रत्नत्रय (तीन रत्न), तीन अज्ञान इत्यादि । [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] वैयावृत्य तप –Vaiyavrttya Tapa Pious service of 10 types of saints by another saints, a kind of internal austerity. तीसरा अंतरंग तप, १० प्रकार के साधुओं की यथायोग्य सेवा करना “
तिर्यक् चतुष्टकय A quartet related to subhuman beings (Tiryanch). तिर्यच गति, तिर्यचगत्यानुपूर्वी, तिर्यचआयु, उद्योत।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
गंगकीर्ति Name of a Bhattarak (learned person). नंदी संघ बलात्कार गण के वारां गद्दी के एक भट्टारक । [[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भूतमुख – Bhutmukha. Name of a dominion ‘Shield’ of Chakravati(em-peror) Bharat & Lord Aranath. चक्रवर्ती भरत तथा भगवान अरनाथ का अस्त्र (ढाल) यह भूतों की मुखाकृतियों से चिन्हित होता था “
तिर्यच जीव Animal and plants, beings other than human, celestial & infernal beings. मनुष्य, देव और नारकी जीवों को छोडकर शेष एकेन्द्रिय से लेकर पंचेन्द्रिय जीव तिर्यंच जीव कहलाते हैं । मन वचन काय की कुटिलता को प्रापत , निकृष्ट अज्ञानी और जिनके अत्यधिक पाप की बहुल्ता पायी जाये , उसको तिर्यंच कहते हैं।[[श्रेणी: शब्दकोष…
खांड Unrefined and uncrystallized sugar. कच्ची शक्कर, शुभ(पुण्य) कर्म प्रकृतियों के द्विस्थानीय अनुभाग का उदाहरण । [[श्रेणी:शब्दकोष]]