पर संग्रहाभास!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पर संग्रहाभास :False, conception related to the existence of supreme spirit only.केवल सत् है’ अन्य कुछ नहीं ऐसा कहना।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पर संग्रहाभास :False, conception related to the existence of supreme spirit only.केवल सत् है’ अन्य कुछ नहीं ऐसा कहना।
तोयस्तम्भिनी A supernatural power of propping water. जल का स्तम्भन करने वाली एक विद्या, रावन ने यह सिद्ध की थी। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
दश द्वार Ten means of air–exit in the body. प्राणायाम करी वायु निकलने के सूक्ष्म छिद्र तालुन्ध्र।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शय्या – Shyyaa. Suitable resting place of saints. भक्तप्रत्याख्यान सल्लेखना के 40 अधिकारों में 25 वां अधिकार, आराधक योग्य वसतिका “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संयम – Sanyama. Abstinence, Restraints, Mortification. व्रत समिति आदि रूप से प्रवर्तना अथवा विशुद्धात्मध्यान में प्रवर्तना संयम है ” 5 इन्द्रिय और मन का वशीकरण तथा षट्काय के जीवों की रक्षा करना “
तोलामुलितेवर Name of an Acharya (writer of ‘Chulamani’). ई.श.7 से पूर्व के एक आचार्य जिन्होंने चूलामणि नामक ग्रंथ की रचना की । [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मुख्य मंगल–Mukhya Mangal. Eulogical hymn of Lord Jinendra for auspiciousness. ज्ञानियो द्वारा शास्त्र के आदि; मध्य व अन्त में विघ्न निवारण के लिए किया जाने वाला जिनेन्द्र देव का गुणस्तवन”
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मुनि प्रायश्चित (शास्त्र)–Muni Prayshchit (Shastra). Name of a treatise written by Acharya Indranandi. आचार्य इन्द्रनंदी (ई.श.10–11) की एक रचना; जिसमे साधुओ के दोषों व शक्ति के अनुसार प्रायश्चित देने की विधि का वर्णन है”