प्रदेशत्व!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रदेशत्व- द्रव्य का एक सामान्य गुण; जिस शक्ति से द्रव्य का कोई न कोई आकार बना रहता है। pradesatva – characteristics of occupancy in any matter
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रदेशत्व- द्रव्य का एक सामान्य गुण; जिस शक्ति से द्रव्य का कोई न कोई आकार बना रहता है। pradesatva – characteristics of occupancy in any matter
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रलय- विनाष, सृश्टि विनाष। अवसर्पिणी काल में छठें-दुखमा काल के उनचास दिन कम इक्कीस हजार वर्शो के बीत जाने पर जंतुओं को भयदायक घोर प्रलयकाल प्रवृत्ती होता है। Pralaya- Dissolution of the world, disaster, catastrophe
दोहापाहुड़ A treatise written by Acharya Yogendudeva. आचार्य योगेन्दु देव (ई.श.6 उत्तरार्ध) कृत एक ग्रंथ। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भवनालय – Bhavanalaya. Residence of deities. भवनवासी देवों के भवन “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रमार्जित- पिच्छी आदि कोमल उपकरण से साफ की हुई भूमि आदि। Pramarjita- Carefully purified place, body etc
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == धनासक्ति : == धन धरती में गाडै बौरा, धूरि आप मुख लावे। मूषक साँप होइगो आखर, तातै अलठि कहावै।। —आनन्दघन ग्रंथावली : पद—४ मूढ़ मानव अपने धन का संरक्षण करने हेतु धन को जमीन में गाड़ता है और उस पर धूल डालता है किन्तु वस्तुत: वह धन के…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रत्येक भंग- जहां अलग-अलग भाव हो वह प्रत्येक भंग है। pratyeka bhamga – each part, different feelings.
[[श्रेणी : शब्दकोष]] वृहतपल्य व्रत –VrhatapalyaVrata. A particular kind of vow to be observed with particular procedure. प्रत्येक माह मे ये कई व्रत आते हैं, यह एक वर्ष तक किया जाता है ” एक वर्ष मे इसके ७२ व्रत होते हैं ” इसमे एक – एक उपवास का पल्य – पल्य उपवास बराबर फल होता…