भुजंगम!
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भुजंगम – Bhujangama. Name of the 14th Teerthankar (Jaina – Lord ) in Videh Kshetra (region). विदेह क्षेत्र में स्थित १४ वें तीर्थकर का नाम “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भुजंगम – Bhujangama. Name of the 14th Teerthankar (Jaina – Lord ) in Videh Kshetra (region). विदेह क्षेत्र में स्थित १४ वें तीर्थकर का नाम “
तिलोयपण्णत्ति A book written by Acharya Yativrishabh. आचार्ययतिवृषभ (ई. 143- 173)द्वारा रचित करणानुयोग का प्राकृत गाथाबद्ध अति प्राचीन प्रामाणिक ग्रंथ , जिसमें तहन लोक का विस्तृत वर्णन है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सूत्रदर्शनार्य – Sutra Darshanaarya. A type of noble persons. दर्शनार्य के 10 भेदो में एक भेद । मुनियों के दीक्षादि का वर्णन करने वाले आचारांग आदि आचार सूत्र को सुनकर जो सम्यग्दर्शन को प्राप्त होते हैं वे सूत्र दर्शनार्य है।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पीठिका – Pithika. Preface, introductory part. भूमिका, प्रस्तावना “
तिर्यक् द्विक A dyad related to subhuman beings (Tiryanch). तिर्यच गति व आनुपूर्वी। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सूचीकर्म – Sucheekarma. Outlining of something or needlework. अनुयोग की निरूक्ति के 5 दृष्टांतो मे एक दृष्टांत । लकडी से किसी वस्तु को तैयार करने के लिये पहिले लकडी के निरूपयोगी भाग को निकालने के लिये उसके ऊपर एक रेखा में जो डोरा डाला जाता है, वह सूचीकर्म है।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पिपीलिका – Pipilika. The ant (3 sensed beings). चींटी. इनके तीन इंद्रिय- स्पर्शन, रसना, घ्राण होती हैं “
तिर्यांच The beings other than human, celestial & infernal beings. मनुष्य , देव और नारकी जीवों को छोड़कर शेष एकेन्द्रिय से लेकर पंचेन्द्रिय तक के जीव तिर्यंच कहलाते हैं। मन वचन काय की कुटिलता को प्राप्त, निकृष्ट अज्ञानी और जिनके अत्यधिक पाप की बहुलता पायी जाये, उसको तिर्यंच कहते है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सुक्ष्म निगोद – Sukshma Nigoda. See- Nigoda Suksma. देखे – निगोद सुक्ष्म ।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] न्यायसूर्यावली – Nyaaysooryaawali. Name of a book. एक न्यायविषयक ग्रंथ “