प्रेक्षा ध्यान!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रेक्षा ध्यान- ध्यान का एक भेद; श्वास अदि को देखते हुए ध्यान करना। Preksa Dhyana- perceptional meditation
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रेक्षा ध्यान- ध्यान का एक भेद; श्वास अदि को देखते हुए ध्यान करना। Preksa Dhyana- perceptional meditation
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मुनि प्रायश्चित (शास्त्र)–Muni Prayshchit (Shastra). Name of a treatise written by Acharya Indranandi. आचार्य इन्द्रनंदी (ई.श.10–11) की एक रचना; जिसमे साधुओ के दोषों व शक्ति के अनुसार प्रायश्चित देने की विधि का वर्णन है”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] षष्ठ बेला – Sastha Belaa. See – Sastha Bhakta. देखें – षष्ठ भक्त “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रियकारिणी- भगवान महावी की माता जो वैषाली के महाराजा चेटक की सात पुत्रियों में से सबसे बड़ी पुत्री थी। अपरनाम-त्रिषला। Priyakarini- mother’s name of lord mahavira
त्रयदंड Three types of punishment. मन-वचन – काय के अशुभ क्रिया रूप तीन दंड है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] षडंशता – Sadanshata. Defining a matter into 6 parts. किसी द्रव्य को 6 अंशों में मानना “
फलरस Fruit juice, Fruitional power of Karmas. अंगूर, आम, आदि के रस । कर्मो की फल देने की शक्ति । [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
तैजस समुद्घात Electric overflow, Phosphorescent extrication. जीवों के अनुग्रह और विनाश में समर्थ तैजस शरीर की रचना के लिए तैजस समुदघात होता है। यह शुभ तैजस और अशुभ तैजस दो प्रकार का है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्वेतरुधिर – Shvetarudhira. Blood having milk colour, one of the 10 excellences of the birth of Lord Arihant. अरहंतो के जन्म के 10 अतिशयों में एक अतिशय, दूध के समान धवल (सफेद ) रुधिर होना “
तेररह Thirteen (13 types of faults and 13 types of conducts in Jainalogy). त्रयोदश पांच पाप, चार कषाय , जुगुप्सा , भय रति, अरति ये 13 दोष है, एंव पांच महावृत , पांच समिति और तीन गुप्ति इस प्रकार चारित्र के 13 भेद यप। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]