त्रिपंचाशत!
त्रिपंचाशत Fifty three,a number (53 auspicious activities of householders). त्रेपन, 53 (गर्भान्वय की 53 क्रियाएँ आदि)। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
त्रिपंचाशत Fifty three,a number (53 auspicious activities of householders). त्रेपन, 53 (गर्भान्वय की 53 क्रियाएँ आदि)। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
आलाबु A hollowed – out gourd (as used by Vedic ascetics to carry water). तुम्बी वैदिक साधुओं द्वारा जो जल के लिए उपयोग की जाती है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शरीर निर्माण क्रम – Shareera Nirmaana Krama. Sequential development of complete body formation. माता के गर्भ में जीव के अंग-उपांग के सम्पूर्ण विकास का क्रम, यह प्रायः 9 माह में पूर्ण होता है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] र्हं – एक मंत्र – ये जिनेन्द्र भगवान का वाचक है। Rham-A spiritual and mystical word of meditation
दारू A typt of wine, A king of Yadu dynasty.शराब, यदु (यादव) वंश का एक राजा। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] राज्योत्तम – रूचक पर्वत पर स्थित एक कूट। यहां रूचकदेवी का निवास है जो तीर्थकर के जन्म में सेवार्थ जाती है। Rajyottama-A summit situated at mountain
[[श्रेणी:शब्दकोष]] ललित कीर्ति – यषकीर्ति न 3 के गुरू और रत्ननंदी द्वि के षिक्षा गुरू। समय ई – 1214, काश्ठसंघी जगतकीर्ति के षिश्य एक मंत्रवादी। कृति महापराण टीका। नंन्दीष्वर व्रत आदि 13 कथाएं। Lalitakirti-Name of saints-(1) Spiritual teacher of ratnanandi-II (2) The disciple of Jagatkirti of Kashtha Group
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रश्मिवेग – पुश्कलावती के विजयार्ध पर त्रिलोकोत्तम नगर के राजा विद्युतगति का पुत्र था।युवावस्था में दीक्षित हुआ, योग में लीन स्थिति में एक अजगर निगल गया।समाधिपूर्वक मरने से अच्यूत स्वर्ग के पुश्कर विमान मे देव हुअ्रा। Rasmivega-The son of kind Vidyutgati of Trilokottam city situated in Pushkalavati country of Vijayardh mountain
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संवाह – Sanvaha. A type of township; prosperous place. नगरों का एक प्रकार ” जहां मस्तक तक ऊचें ऊचें धान्य के ढेर लगे रहते हैं वेह संवाह नगर कहलाता हैं ” समुन्द्र की बेला से वेसिस्ट स्थान “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रविन्द्र कुमार बह्यचारी – गणिनिप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी के एक प्रमुख षिश्य जम्बद्वीप रचना हस्तिनापुर के प्रमुख स्तम्भ।सन् 1972 में आजन्म ब्रहमचार्य व्रत लेकर क्रमष घर्मक्षेत्र में अथक परिश्रम करके माताजी की प्रेरणा से जम्बुद्वीप हस्तिनापर, तपस्थली प्रयाग, कुण्डलपुर, मांतुगा, अयाध्या एवं अनेक तीर्थ क्षेत्रो का विकास करते हुए जैन धर्म की संस्क्ति का…