मुनियज्ञ!
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मुनियज्ञ–Muniyagya. See – Munigupta. देखे– मुनिगुप्त”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सूक्ष्मकायिक जीव – Sukshamakaayika Jeeva. Micro organism, one-sensed beings etc. वे एकेन्द्रिय जीव जो सर्व लोक में व्याप्त हैं एवं जिनकी गति का जल-स्थल आदि के द्वारा प्रतिघात नहीं होता है अर्थात् जो न किसी को रोकते है ओर न किसी से रूकते (बाधित) है।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] न्यायविनिश्चयविवरण – Nyaayvinischyavivrna. Name of a book. एक न्यायविविषयक ग्रंथ “
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == तपस्वी : == नाऽपि तुण्डितेन श्रमण:, न ओंकारेण ब्राह्मण:। न मुनिररण्यवासेन, कुशचीरेण न तापस:।। —समणसुत्त : ३४१ केवल सिर मुंडाने से कोई श्रमण नहीं होता, ओम् का जप करने से कोई ब्राह्मण नहीं होता, अरण्य में रहने से कोई मुनि नहीं होता, कुश—चीवर धारण करने से कोई तपस्वी…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सुषमादुषमा काल – Sushamaa-Dushamaa Kaala. Pleasant & sorrowful long period of woridily cycle ( the 3nd of Avasarpini Kal & the 4th of Utsarpini Kal According to Jaina Philosoph) अवसर्पिणी के तृतीय काल और उत्सर्पिणी के चतुर्थ काल का नाम । इसका काल 2 कोड़ाकोड़ी सागर प्रमाण है। इस समय जघन्य भोगभूमि रहती है,…
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भवविचय – Bhavavicaya. Right meditation on materialistic world or cycle of birth. सातवाँ धर्मध्यान; भव – संसार सदैव दुःख रूप ही है’ ऐसा चिंतन करना “
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == क्रोध : == पासम्मि बहिणिमायं, सिसुं पि हणेइ कोहंधो। —वसुनन्दि श्रावकाचार : ६७ क्रोध में अंधा हुआ मनुष्य पास में खड़ी माँ, बहिन और बच्चे को भी मारने लग जाता है। कोवेण रक्खसो वा, णराण भीमो णरो हवदि। —भगवती आराधना : १३६१ क्रुद्ध मनुष्य राक्षस की तरह भयंकर…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वर्गधारा – Vargadhaaraa.: A type of mathematical series. श्रेणी व्यवहार गणित की सर्वधारा आदि 14 धाराओं में एक ; 1, 4, 9,16 (12, 22,32,42)………….
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भवन – Bhavana. Residential places (of human being, deities etc.) भवनवासी देवों के रहने के स्थान एवं मनुष्यों के आवास भवन कहलाते हैं “