यथाजात!
[[श्रेणी :शब्दकोष]] यथाजात–Yathajaat. Naked form, Natural form. अंतरंग में वीतरागता एवं बह्मा में निष्परिग्रही बालकवत निर्विकार नग्न रूप”
[[श्रेणी :शब्दकोष]] यथाजात–Yathajaat. Naked form, Natural form. अंतरंग में वीतरागता एवं बह्मा में निष्परिग्रही बालकवत निर्विकार नग्न रूप”
खट्वांङ्ग Human skull placed on a bone (symbol of a terrific divinity). एक हड्डी पर मानव खोपड़ी का होना ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
देशत्याग Gradual renunciation of sins (duty of householder). श्रावक धर्म पापों का कुछ अंशों में त्याग करना।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == गुरु : == सं किं गुरु: पिता सुहृदा योऽभ्यसूययाऽर्भं बहुदोषम्, बहुषु वा दोषं प्रकाशयति न शिक्षयति च।। —नीतिवाक्यामृत : ११-५३ वे गुरु, पिता व मित्र निन्दनीय या शत्रु सदृश हैं, जो ईष्र्यावश अपने बहुदोषी शिष्य, पुत्र व मित्र के दोष दूसरों के समक्ष प्रकट करते हैं और उसे…
देवचंद्र Name of the disciple of ‘Maghnandi Kolhapuriya’. ई. 1133-1163 में माघनन्दि कोल्हापुरीय के शिष्य।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रतिवादी – Prativaadee. Respondent, defendant. प रतिपक्षी, विपक्षी “
देवगति नामकर्म प्रकृति Karmic nature causing birth in the form of deities. जिस कर्म के उदय से जीव देवगति में जन्म लेता है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == तीव्रकषायी : == आत्मप्रशंसनकरणं, पूज्येषु अपि दोषग्रहणशीलत्वम्। वैरधारणं च सुचिरं, तीव्रकषायाणां लिंगानि।। —समणसुत्त : ६०० अपनी प्रशंसा करना, पूज्य पुरुषों में भी दोष निकालने का स्वभाव होना, दीर्घकाल तक वैर की गाँठ को बांधे रखना—ये तीव्रकषाय वाले जीवों के लक्षण हैं।