चैतन्यानुविधाई!
चैतन्यानुविधायी Result related with only consciousness. उपयोग; चैतन्य अन्वयी अर्थात् चैतन्य को छोड़कर अन्यत्र नहीं रहता वह परिणाम । [[श्रेणी:शब्दकोष]]
चैतन्यानुविधायी Result related with only consciousness. उपयोग; चैतन्य अन्वयी अर्थात् चैतन्य को छोड़कर अन्यत्र नहीं रहता वह परिणाम । [[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्थपति – Sthapati. Architect, one of the 14 jewels of chakrawarti (emperor).भवन निर्माण कला मे निपुण वास्तुकार, चक्रवर्ताीे के 14 रत्नो मे एक रत्न। जो वास्तुविद्या का पारगामी होता है।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लगड शय्यासन तप – कायक्लेष तप का एक भेद, षरीर को संकुचित करना। Lagada sayyasana tapa-A kind of austerity, sleeping with Shrunk limbs
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विश्वसेन – Vishvasena. Father’s Name of Lord parshvanath & Lord Shantinath. भगवान पाशर्वनाथ एवं शांतिनाथ के पिता का नाम ” पाशर्वनाथ भगवान के पिता का नाम अश्वसेन भी है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] समुद्रविजय – Samudravijaya. Father’s name of the 22nd Tirthankar (Jaina Lord) Neminath. 22 वें तीर्थकर नेमिनाथ के पिता। शैरीपुर के राजा अन्धकवृष्णि और सुभद्रा के 10 पुत्रों मे प्रथम पुत्र।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] ल.को. – लक्षकोटि की सहनहानि। एक लाख करोड। La ko-A symbolic expression for a large number (one lac crore)
छत्रत्रय Triple parasol, an auspicious emblem of Lord Arihant. भगवान के आठ प्रातिहार्यों में से एक . ये तीनों लोकों के स्वामित्व को सूचित करते हैं ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] समुत्पत्ति – Samutpatti. Birth, origin, creation. मूल, पैदावार।
तीसरी भूमिका Modified state of soul. प्रतिक्रमण्रा आदि के विकल्पों से रहित शुद्धात्मा की भूमिका । [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == संवर : == सर्वभूतात्मभूतस्य, सम्यक् भूतानि पश्यत:। पिहितास्रवस्य दान्तस्य, पापं कर्म न बध्यते।। —समणसुत्त : ६०७ जो समस्त प्राणियों को आत्मवत् देखता है और जिसने कर्मास्रव के सारे द्वार बंद कर दिए हैं उस संयमी को पापकर्म का बंध नहीं होता। तपसा चैव न मोक्ष:, संवरहीनस्य भवति जिनवचने।…