धनपाल!
धनपाल A type of peripatetic celestials, Name of the writer of ‘Bhavishyadatta Charitra’. यक्ष जाति के व्यंतर देवों के 12 भेदों में नवां भेद, ‘ भविष्यदत्त चरित्र’ प्राकृत के कर्ता।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
धनपाल A type of peripatetic celestials, Name of the writer of ‘Bhavishyadatta Charitra’. यक्ष जाति के व्यंतर देवों के 12 भेदों में नवां भेद, ‘ भविष्यदत्त चरित्र’ प्राकृत के कर्ता।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वस्तु – Vastu.: A typr of scriptural knowledge (Shrutgyan),Substance, Matter,Object. श्रुतज्ञान के बीस भेदों में 17वां भेद ” सत्ता,सत्व ,द्रव्य ,वस्तु आदि एकार्थवाची हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संयोगसंबंध – Sanyoga Sambandha. A synthetical relation. पृथक् सिद्ध पदार्थों के मेल को संयोग संबंध कहते हैं “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भरतकूट – Bharatakuta. Name of summits of Vijayardh & Himvan moun- tains. विजयार्ध पर्वत की उत्तर व दक्षिण श्रेणियों पर स्थित कूट एंव हिमवान् पर्वत पर स्थित एक कूट “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वसंतभद्र व्रत – Vasantabhadra Vrata.: A specified and procedural fasting. एक व्रत ” इसमें क्रमशः 5,6,7,8,9 इस प्रकार 25 उपवास और बीच के स्थानों में एक – एक पारणा की जाती है “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भुजंगदेव – Bhujangadeva. A type of peripatetic deities living at some up – per distance from the earth. महोरग जाति के व्यंतरों का एक भेद, लवण समुद्र के ऊपर आकाश में स्थित भुजंग नामक देवों की २८ हजार नगरियाँ हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वर्षा ऋतु – Varshaa Ritu.: Rainy season. 6 ऋतुओं में एक ऋतु ; बरसात का समय इसमें साधु वर्षायोग या चातुर्मास धारण करते हैं “
द्वीपायन A king of Kuru dynasty, by whose passionate anger Dwarika was burnt when he was in Muni stage. कुरूवंश के एक राजा , जो आगे चलकर एक मुनि हुए जिनके क्रोध से द्वारिका भस्म हुई। इनका अपरनाम – द्वैपायन मुनि भी है। विशेष कथा हरिवंशपुराण एंव पाण्डवपुराण में देखें ।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वर्तमान काल – Vartmaana Kaal.: Period of present time. चल रहा समय, विविक्षित पर्याय के प्रारंभ से अंत होने तक का काल ” यह दो प्रकार के है – सूक्ष्म – एक समयमात्र ,स्थूल – अंतर्मुहूर्त से लेकर संख्यात वर्ष तक “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भागचंद – Bhagachanda. Name of a Pandit who wrote Mahavirashtak Stotra and many other books. महावीरष्ठक स्तोत्र, अमितगती श्रावकाचार वचनिका आदि ग्रंथो के कर्ता एक पंडित “