चन्द्रप्रभ!
चन्द्रप्रभ A disciple of Jaysingh Suri. जयसिंह सूरि के शिष्य जिन्होंने प्रमेयरत्नकोष तथा दर्शनशुद्धि नामक न्यायविषयक दो ग्रन्थ लिखे . समय- ई. ११२० ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
चन्द्रप्रभ A disciple of Jaysingh Suri. जयसिंह सूरि के शिष्य जिन्होंने प्रमेयरत्नकोष तथा दर्शनशुद्धि नामक न्यायविषयक दो ग्रन्थ लिखे . समय- ई. ११२० ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रत्याख्यान कषाय- pratyakhyana kasaya Obscuring passion in observing abstinent vows. पूर्ण व्रत या संयम के पालन में बाधक कशाय, इसकी अवधि 15 दिन की होती है।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विरक्त – Virakta. One with aversion from the worldly life (attach-ments), indifferent, A recluse. उदासीन, सांसारिक राग या लालसा से मुक्त, जो इन्द्रिय विषयों से विरक्त होता है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रतीति- pratiti Experience, conviction, belief द्रिष्टि श्रधा रुचि।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भद्रमित्र – Bhadramitra. Name of the counselor of the king of Sinhpu, another name is Satyaghosh. सिंहपुर के राजा का मंत्री, अपरनाम सत्यघोष ” आगे चौथे भव में मोक्ष प्राप्त किया “
[[श्रेणी: शब्दकोष]]स्वस्थान संयत – Svasthaana Sammyata. See- Svasthaana Apramatta. देखे- स्वस्थान अप्रमत्त। मूल व उत्तर गुणो से मिण्डत, व्यक्त व अव्यक्त परिणाम से रहित कषायो का अनुपशामक व अक्षपक होते हुए भी ध्यान मे लीन अप्रमत्तसंयत स्वस्थान अप्रमत्त कहलाता है।
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == कृपणता : == करिणो हरि—नहरविदारियस्स दीसंति मुत्तिया कुम्मे। अहव किवणाण मरणे पथडच्चिय होंति भंडारा।। —गाहारयण कोष : १५५ िंसह के नख से विदारित होने पर हाथी के कुम्भस्थल में मोती दिखाई पड़ते हैं अथवा कृपणों के मरने पर ही उनका भंडार (धन) प्रकट होता है। सोसं न गओ…
[[श्रेणी: शब्दकोष]]स्ववात्सल्य – Svavaatsalya. Self affection. वात्सल्य के दो भेदो मे एक भेद। स्वद्रव्य मे रति अर्थात् अपनी आत्मा से सम्बन्ध रखने वालाक वात्सल्य प्रधान है।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भावन लोक – Bhavana Loka. Place of residence of deities. जहां असुरकुमार आदि भवनवासी देवों के भवन हैं अर्थात् खरभाग- पंकभाग “
[[श्रेणी: शब्दकोष]]स्वर्गवासी देव – Svargavaasii Deva. Heavenly deities. कल्पवासी देव-वैमानिक देव अर्थात् 16 स्वर्ग, 9 गै्रवेयक, 9 अनुदिष, 5 अनुत्तर के निवासी देव।