फलदान!
फलदान State of Karma causing fruition. अपने फल के उत्पन्न करने में समर्थ कर्म अवस्था । [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
फलदान State of Karma causing fruition. अपने फल के उत्पन्न करने में समर्थ कर्म अवस्था । [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रमाणीमांसा- देंखे- प्रमाण परीक्षा। Pramanamimamsa- See- PramanaPariksa
फालि Accumulated matters in some particular time. एक समय में उठाये गये समस्त द्रव्य को एक फालि कहते हैं [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रमाण- जिसके द्वारा पदार्थ जाना जाता है। सम्यग्ज्ञान; इसके मति, श्रुत, अवधि, मनःपर्यय, केवलज्ञान 5 भेद है। Pramana- Right knowledge
[[श्रेणी:शब्दकोष]] राध – परद्रव्य के परिहार से षुद्ध आत्मा की सिद्धि अथवा साधन राध कहलाता है।आराधना प्रसन्नता पूर्णता सिद्धि साधित आराधिन सेसिद्धि आदि राध के ही पर्यावाची नाम है। Radha-Pertaining to attainment of spiritual power
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रभावना अंग- सम्बदर्षनका आठवाँ अंग। Prabhavanaanga- The 8th qualitative part of Samyakdarshan (right belief)
दिग्पाल A type of guardian deities. दिक्कुमार जाति के देव लोकपाल इन्हीं देवों में से होते है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रत्याख्यानी भाषा- किसी वस्तु का परित्याग करने की सूचक भाषा – जैसे “मै अनछना पानी छोड़ता हूँ” आदि बोलना। pratyakhyani bhasa- pronunciation or renunciation with instructions, language of determination.
[[श्रेणी : शब्दकोष]] वीरसागर (आचार्य) –Virasagara (Acarya) Name of the first disciple of CharitraChakravartiAcharyaShriShantisagarjiMaharaj in his Acharya tradition. चरित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शान्तिसागर महाराज के प्रथम शिष्य एवं उनकी परम्परा में पटाटाघीश आचार्य ” जन्म – सन १८७६ में आषाढ शुक्ला १५ (गुरु पूर्णिमा ) एवं समाधि – संन १९५७ आश्विन कृ. अमावस ” सन…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सहवर्ती – Sahavartee. Co-existing one. द्रव्य गुण सहवर्ती और पर्यायें क्रमवर्ती होती है। देखे – सहभूत ।