निशिक्त्त!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निशिक्त्त – Nishikta. Spread, Sprinkled, Percveded. व्याप्त किया हुआ, छिड़का हुआ “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निशिक्त्त – Nishikta. Spread, Sprinkled, Percveded. व्याप्त किया हुआ, छिड़का हुआ “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] ममकार – Mamakara. My-ness , A feeling of mine with worldly objects. आत्मा से भिन्न पर पदार्थों में मेरेपन का भाव ममकार हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शिखरनी – Shikharanee. A sweet dish (Shrikhand) prepared with curd and sugar etc. विशेष विधिपूर्वक दही में शक्कर, केशर, इलाइची आदि डालने से बना श्रीखंड “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निश्चल – Nishchala. Name of the 61st planet. 88 ग्रहों में 61वें ग्रह का नाम “
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == सम्यक् दर्शन : == सम्मद्दंसणलंभो वरं खु तेलोक्कलंभादो। —भगवती आराधना : ७४२ सम्यक् दर्शन की प्राप्ति तीन लोक के ऐश्वर्य से भी श्रेष्ठ है। यथार्थतत्त्व श्रद्धा सम्यक्त्वम्। —जैन सिद्धान्त दीपिका : ५-३ जीवादि तत्त्वों की यथार्थश्रद्धा (सम्यक्—विचार) करना सम्यक् दर्शन है। दर्शनभ्रष्टा: भ्रष्टा:, दर्शनभ्रष्टस्य नास्ति निर्वाणम्। सिध्यन्ति चरितभ्रष्टा:,…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शास्त्रसार समुच्चय – Shaastrasaara Smuchchaya. Name of a book written by Maghnandi Yogindra. माघनंदि योगीन्द्र (ई. श. 12 उत्तरार्द्ध) कृत 196 संस्कृत सूत्र प्रमाण सिद्धांत ग्रंथ “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निश्चय विनय – Nishchaya Vinaya. Reverence with supreme purity of soul. शुद्धात्मा के प्रति विनम्रता, लीनता एवं शुद्धि निश्चय विनय है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लाब्धिसम्पन्न ऋषि – सम्यग्दर्षन प्राप्ति का एक निमित लब्धिसम्पन्न ऋशियो का दर्षन। Labdhisampanna Rsi-Super saints, visiting of whom is a cause of right faith
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शामकुंड – Shaamakunda. Name of a commentator of first 5 parts of ‘Shatkhand’. षटखण्ड आगम के 5 खण्डों पर पद्धति नामक टीका के रचयिता ” समय ई.श. 3 का उत्तरार्ध “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निश्चय निर्विचिकित्सा – Nishchaya Nirvichikitsaa. Tending towards knowing oneself or soul perfectly. मुनि अवस्था में समस्त राग-द्वेष आदि विकल्प रूप तरंगों का त्याग करके निर्मल आत्मानुभव लक्षण की निज शुद्धात्मा में स्थिति करना “