परलोक!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] परलोक:Alien world- heaven, supreme place of salvation.उत्कृठचिदानंद शुद्व स्वभावी आत्मा का लोक। व्यवहारनय से स्वर्ग मोक्ष को परलोक कहते हैं।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] परलोक:Alien world- heaven, supreme place of salvation.उत्कृठचिदानंद शुद्व स्वभावी आत्मा का लोक। व्यवहारनय से स्वर्ग मोक्ष को परलोक कहते हैं।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] अनिष्टसंयोगज-विष,कांटा,शत्रु आदि अप्रिय वस्तु का संयोग होने पर उससे पीछा छुड़ाने के लिये बार-बार विचार अनिष्टसंयोगज आर्त्तध्यान है”
आलाप पद्धति A book written by ‘Acharya Devasen’. आचार्य देवसेन (वि.990-1012) द्वारा संस्कृत गद्य में रचित प्रमाण नय विषयक सूत्र ग्रंथ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
ऋषिदास An Anuttaropapadak, who takes birth in the space craft (Anuttar) in the era of Lord Mahavira. भगवान महावीर के शासन में अनुत्तर विमान में जन्म लेने वाले मुनि।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सामान्य – Saamaanya. General, common, ordinary, normal. समान अर्थात् एकता का भाव सामान्य है। द्रव्य, सामान्य, उत्सर्ग, अनुवृत्ति, सत्ता, सत्व, सत् अन्वय, वस्तु, अर्थ, विधि, अविशेष ये सब एकार्थवाचक शब्द है।
ऋद्धि Supernatural power, Miraculous success. तपश्चरण के प्रभाव से कदाचित् किन्हीं योगीजनों अर्थात् महामुनियों को कुछ चमत्कारिक शक्तियाँ प्राप्त हो जाना ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
ऋ The seventh vowel of the Devanagari syllabary. देवनागरी वर्णमाला का सातवां स्वर।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
एकजीव-एक अजीव कर्म Karma related to soul and non soul matters. जीव के उपयोग स्वरूप – द्वेषादिक जीव कर्म, कार्मण स्कंधों की अवस्था अजीव कर्म।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संवेग – Sanvega. Mental agitation, Instinct, To have fear with the sufferings of wordly life. मन में उठने वाली भावना, अन्तःप्रेरणा, सम्यग्दर्शन के चार गुणों में से एक-संसार के दुःखों से नित्य डरते रहना अथवा पंचपरिवर्तन रूप संसार से भय उत्पन्न होना “