पूर्वाफाल्गुनी!
[[श्रेणी : शब्दकोष]] पूर्वाफाल्गुनी – Purvaphalguni. Name of a lunar. एक नक्षत्र का नाम “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] पूर्वाफाल्गुनी – Purvaphalguni. Name of a lunar. एक नक्षत्र का नाम “
ख The second consonant of the Devanagari syllabary. देवनागरी लिपि का दूसरा व्यंजन अक्षर , इसका उच्चारण स्थान कंठ है ।[[श्रेणी:शब्दकोष]] अथवा Sky, Sense organ, Infinite. आकाश, इन्द्रिय, अनंत या अनंता की अपेक्षा सहनानी ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी :शब्दकोष]] यंत्रेशयंत्र–Yantresa yantra. A metallic plate engraved with some auspicious mystic diagram & words. एक विशेष यंत्र; यंत्रेश मंत्र की विभिन्न रेखाक्रतियो में चित्रित रचना”
खट्वांङ्ग Human skull placed on a bone (symbol of a terrific divinity). एक हड्डी पर मानव खोपड़ी का होना ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == गुरु : == सं किं गुरु: पिता सुहृदा योऽभ्यसूययाऽर्भं बहुदोषम्, बहुषु वा दोषं प्रकाशयति न शिक्षयति च।। —नीतिवाक्यामृत : ११-५३ वे गुरु, पिता व मित्र निन्दनीय या शत्रु सदृश हैं, जो ईष्र्यावश अपने बहुदोषी शिष्य, पुत्र व मित्र के दोष दूसरों के समक्ष प्रकट करते हैं और उसे…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रतिवादी – Prativaadee. Respondent, defendant. प रतिपक्षी, विपक्षी “
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == तीव्रकषायी : == आत्मप्रशंसनकरणं, पूज्येषु अपि दोषग्रहणशीलत्वम्। वैरधारणं च सुचिरं, तीव्रकषायाणां लिंगानि।। —समणसुत्त : ६०० अपनी प्रशंसा करना, पूज्य पुरुषों में भी दोष निकालने का स्वभाव होना, दीर्घकाल तक वैर की गाँठ को बांधे रखना—ये तीव्रकषाय वाले जीवों के लक्षण हैं।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लाट – गुजरात के प्राचीन काल मे तीन भाग थे। उसमें से गुजरात का मध्य व दक्षिण भाग लाट कहलाता था। Lata-South and middle part of Gujrat state (of ancient time)