यजुर्वेद!
[[श्रेणी :शब्दकोष]] यजुर्वेद–Yajurved. One of the four great and sacred vedic scriptures. वैदिक परम्परा के4 वेदों में एक वेद का नाम”
[[श्रेणी :शब्दकोष]] यजुर्वेद–Yajurved. One of the four great and sacred vedic scriptures. वैदिक परम्परा के4 वेदों में एक वेद का नाम”
गांधारी A summit of Shikhari mountain. भगवान वासुपूज्य की शासन यक्षिणी , धृतराष्ट्र की पत्नी ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भावयुति – Bhavayuti. Psychical worldly attachments. क्रोध, मान, माया और लोभादिक के साथ जीवादि द्रव्यों का मिलाप होना “
गारूत्मणि A type of gem causing the removal of the effect of snake poison. सर्प के विष को दूर करने वाली गरूड़ मणि ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मेधावी–Medhavi. Wise, Intelligent, Name of a disciple of Jinchandra Bhattarak who wrote a treatise ‘Dharma Sangrah Shravakachara’ बुद्धिमान, भट्टारक जिनचंद्र के शिष्य एवं धर्म संग्रहश्रावकाचार केकर्त्ता(ई. सन1462–1484)”
दानवीर Extremely charitable, A title, Philanthrophist. महान दानी व्यक्तियों की एक उपाधि, भामाशाह को यह उपाधि प्राप्त थी। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == कुपुत्र : == सयलजणनयणकडुयं नित्यामं तह पयायपरब्भट्ठं। नियतणयं धूमं पेच्छिऊण छारं गओ अग्गी।। —गाहारयणकोष : ८१० समस्त लोगों की आँखों को कडुवा लगने वाला, पुरुषार्थ रहित, प्रताप से भ्रष्ट अपने पुत्र धुएं को देखकर आग (लज्जा से) स्वयं जलकर राख बन गई है। (बड़े व्यक्ति भी अपने कुपुत्रों से…
गतदेह Bodiless salvated soul (Lord Siddha). अशरीरी सिद्ध भगवान ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पूर्व जिनचैत्य क्रिया – Poorva jinachaitya kriyaa. A type of relegious activity pertaining to reveieing of the same idol of Lord in particular period of 6 months. विहार करते छः महीने से पहले उसी प्रतिमा के पुनः दर्शन हो तो उसे पूर्व जिनचैत्य कहते हैं एवं पूर्व जिनचैत्य का दर्शन करते समय पाक्षिकी क्रिया…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] नंदिषेण – Namdisena Name of the Acharya, 6th Balbhadra, Past-birth name of Lord Chandraprabhu & Lord Suparshvanath, the 3rd predestined Narayan. पुत्राट संघी एक आचार्य जितदण्ड के शिष्य और दीपसेन के गुरु, छठें बलभद्र का नाम, चंद्रप्रभु एवं सुपार्शव भगवान के पूर्व भव का नाम, भारतक्षेत्र के आगामी तीसरे नारायण ”